राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को सिम्स ऑडिटोरियम में काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद काशीनाथ गोरे पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया। इस दौरान भागवत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हर कोई काशीनाथ बन जाए, लेकिन हर किसी को स्वयंसेवक जरूर होना चाहिए। मोहन भागवत ने काशीनाथ गोरे को लोकहितकारी स्वयंसेवक बताया। उन्होंने कहा कि आजकल लोग RSS के 100 साल पूरे होने की चर्चा करते हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के संघर्ष और कठिनाइयों को कोई नहीं जानता। संघ कार्यकर्ताओं ने अनुशासन, सेवा और संपर्क से संगठन को मजबूत किया। भागवत ने कहा कि हम पहले अपने घर से, फिर पड़ोस और फिर देश से जुड़ते हैं, इसीलिए हम कहते हैं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’। काशीनाथ गोरे ने हर जगह अपनी जिम्मेदारी निभाई। संघ प्रमुख के आगमन को लेकर शहर में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतेजाम किए गए हैं। सिम्स ऑडिटोरियम परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है। वहीं पुलिस और प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल के अंदर-बाहर चाक-चौबंद बंदोबस्त किए हैं। पहले ये तस्वीरें देखिए… रमन सिंह ने काशीनाथ जी से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने काशीनाथ जी से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वे प्रैक्टिसिंग डॉक्टर थे, तब काशीनाथ गोरे उन्हें देवार मोहल्ले लेकर गए थे। वहां चारों ओर सूअर ही सूअर थे, लेकिन एक दिन मोहल्ले की बच्चियों ने उनके पैर पखारकर सम्मान किया। डॉ. सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि उस दिन से लोग मुझे शनिचर डॉक्टर कहने लगे और उसी दिन मेरा भाग्य जाग गया। इसके पहले रमन सिंह ने कहा था कि जब मैं राजनीति की शुरुआत कर रहा था, तब काशीनाथ गोरे जी का कवर्धा में प्रवास होता था। वह मुझे एक डॉक्टर के रूप में जानते थे। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा पर बहुत काम किया। काशीनाथ ने समाज और राष्ट्र की सेवा में लगा दिया जीवन आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा और सचिव बृजेन्द्र शुक्ला ने बताया कि, स्मारिका में दिवंगत काशीनाथ गोरे के सामाजिक योगदान, पारिवारिक जीवन और राष्ट्रसेवा से जुड़े प्रेरणादायी संस्करणों को समाहित किया गया है। काशीनाथ गोरे ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा में लगा दिया था। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। इस स्मारिका के माध्यम से उनके कार्यों और विचारों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। लोकसभा चुनाव के पहले किया था दौरा, पहली बार बिताएंगे रात इससे पहले RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत लोकसभा चुनाव के पहले बिलासपुर दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चर्चा की थी। वहीं, साल 2021 में संघ के समरसता कार्यक्रम में मुंगेली जिले के मदकूद्वीप आए थे। जहां उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस बार उनका यह कार्यक्रम संघ प्रायोजित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट का आयोजन है। पहली बार RSS प्रमुख भागवत बिलासपुर में रात बिताएंगे। इसके बाद रविवार की सुबह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना होंगे। संघ प्रमुख को मिली है जेड प्लस सुरक्षा, एसपीजी ने किया रिहर्सल RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के आने से पहले सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई। एसपीजी ने शुक्रवार को उनकी सुरक्षा का रिहर्सल किया था। पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के साथ एसएसपी रजनेश सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। एसएसपी ने कहा था कि आरएसएस प्रमुख के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्धों से पूछताछ की जारी है। वे ट्रेन से यहां पहुंचेंगे।इसके लिए रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाई गई है। अब जानिए काशीनाथ गोरे और उनके परिवार के बारे में काशीनाथ गोरे का परिवार संघ से जुड़ा था। उनके पिता यशवंत नरहर गोरे भी बचपन से संघ से जुड़े थे। वे रेलवे में कार्यरत थे। जब संघ के कार्य में उनकी केंद्र सरकार की नौकरी आड़े आई, तब उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़ दी। किराना दुकान कर परिवार का गुजारा करने लगे, लेकिन संघ को नहीं छोड़ा। अपने पिता और परिवार के सदस्यों से प्रेरणा लेकर काशीनाथ गोरे ने संघ परिवार के लिए जीवन भर काम किया। कुष्ठ रोगियों की भी करते रहे सेवा काशीनाथ गोरे एक अच्छे बांसुरी वादक भी थे। वे घर में भी हंसी मजाक में ही गंभीर से गंभीर बातों को समझा देते थे। वे सभी को समान दृष्टिकोण से देखते थे। उनका संघ के सभी बड़े पदाधिकारी व भाजपा के बड़े नेताओं से सीधा जुड़ाव था। उन्होंने चांपा स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ से जुड़कर कुष्ठ रोगियों की सेवा की। वहीं, सेवा भारती नाम की संस्था से भी जुड़कर जरूरतमंदों की मदद करते रहे। कांशीनाथ गोरे संघ से अलग हटकर भी लोगों की मदद करते रहे हैं। मुंबई के कैंसर अस्पताल में इलाज कराने के लिए जाने वाले लोगों को सहयोग करने और परिजन को वहां नानावती धर्मशाला में ठहराने की व्यवस्था करते थे। मदद करते समय उन्होंने कभी यह ध्यान नहीं दिया कि कांग्रेसी है या भाजपाई। जो भी उनके पास जाते, सभी को बराबर मदद करते थे।


