RSS-RNX डिजिट के VIP-नंबर लाखों में बेच रहे थे दलाल:आरटीओ से 257 नंबर 21-21 हजार में खरीदे; दावा किया इनका रिकॉर्ड आग में जला

सवाई माधोपुर RTO में बड़ी धांधली सामने आई है। यहां से पूरे प्रदेश के लिए VIP नंबरों को जारी करने का काम किया जा रहा था। इसमें उन नंबरों को जारी किया जा रहा था जिन नंबरों की गाड़ी कभी थी ही नहीं। यहां से जयपुर के दलाल इन नंबरों को 21 हजार DD (बेस प्राइज) पर ले जा कर वाहन मालिकों को बेच रहे थे। इसकी शिकायत मुख्यालय पर हुई तो इस बड़ी धांधली का खुलासा हुआ। अकेले सवाई माधोपुर से सिर्फ 3 साल में ऐसे 257 वाहनों के नंबर जारी किए गए थे। जांच में सामने आया कि दलालों ने कौड़ियों के दाम में इन नंबरों खरीद कर 4 से 5 लाख में सौदा किया था। इसमें RTO अमरावत को इसकी जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था। लेकिन, अमरावत समय पर जांच की रिपोर्ट पेश नहीं कर पाए। ऐसे में विभाग ने उन्हें निलंबित करके मुख्यालय जयपुर कर दिया है। इस मामले में डिप्टी सीएम और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा-मामले में शामिल किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। विभाग स्तर पर संबंधित जिम्मेदारों को पहले से निर्देश दे दिए गए है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थ्री-डिजिट नंबर प्लेट मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसके लिए जांच के आदेश जारी कर दिए गए है। जांच निष्कर्ष के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दैनिक भास्कर में पढ़िए 3 डिजिट VIP नंबरों की धांधली का खेल….
कार्यवाहक DTO ने बताया- विभाग को शिकायत मिली थी कि सवाई माधोपुर जिले के RTO ऑफिस से 1980 के पहले के VIP नंबर जारी हो रहे हैं। इसमें RSS, RNX RJX जैसी सीरीज के नंबर थे। ये नंबर जयपुर समेत अन्य जिलों के दलाल यहां से 21 हजार के बेस प्राइज में ले जा रहे थे और अपने स्थानीय RTO ऑफिस में महंगे दामों पर बेच रहे थे। जब शिकायत विभाग और परिवहन मंत्रालय तक पहुंची तो इसमें जांच बैठाई गई थी। जांच में सामने आया कि इस घोटाले में प्रदेश के करीब 400 कार्मिकों की मिलीभगत से काम हो रहा था। ​दलालों ने आरटीओ से कौड़ियों के दाम में खरीदे, जयपुर में बड़ी डील इन वीआईपी नंबरों को जारी करने से पहले इन नंबर की गाड़ियों को फिटनेस सेंटर में ले जाना होता है। वहां स्क्रैपिंग के बाद सर्टिफिकेट जारी होता है। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर इन नंबर को जारी किया जाता है। जांच में सामने आया कि इन नंबरों को जारी करने के लिए किसी प्रोसेस को पूरा नहीं किया गया। सवाई माधोपुर के आरटीओ ऑफिस से दलालों ने इन नंबर को 21-21 हजार में खरीदा। इसके बाद जयपुर में दूसरे दलालों से डील कर 4 से 5 लाख रुपए में इन नंबरों का सौदा किया गया। जब ये बाद जयपुर में अधिकारियों को पता चली तो जांच करवाई। सामने आया कि जयपुर में इन नंबरों की डील हो रही है। इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि ये नंबर सवाई माधोपुर डीटीओ ऑफिस से जारी किए गए थे। जांच रिपोर्ट में खुलासा-257 नंबर जांच के घेरे में अपर आयुक्त रेणु खंडेलवाल की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि परिवहन विभाग में पुराने 3 डिजिट वाहन नंबरों की आवंटन प्रक्रिया में थी। जांच में सामने आया कि नंबरों के बैकलॉग में अनियमितताएं हुई थीं। जानकारी के अनुसार, सवाई माधोपुर जिला परिवहन कार्यालय से 1980 के दशक में आवंटित 257 वाहनों के नंबर जांच के घेरे में हैं। यह नंबर RSS, RSY, RSM से शुरू होते हैं। 257 में से केवल 2 वाहनों का रिकॉर्ड ही RTO के पास है बाकी के वाहनों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका मतलब इन वाहनों का कभी अस्तित्व रहा ही नहीं। जब बाकी नंबर से जुड़े रिकॉर्ड मांगे तो दावा किया गया कि 6 महीने पहले डीटीओ ऑफिस में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी और इस आग में इन नंबर से जुड़े सारे डॉक्यूमेंट जल गए। इसकी एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। ये होता है प्रोसेस
नियमानुसार पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैप सेंटर में जमा कराया जाता है। जिसके बाद सेंटर से स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाता है। सर्टिफिकेट देने के बाद परिवहन विभाग के पोर्टल पर ‘रिटेंशन पंजीयन’ विकल्प चुनकर नए वाहन के लिए आवेदन किया जाता है। निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद नया नंबर जैसे RSS 2424, RNX 8055 मिलता है। वहीं सवाई माधोपुर जिला परिवहन विभाग की ओर से स्क्रैप सर्टिफिकेट नहीं होने पर भी यह नंबर आवंटित कर दिए गए। ये खबर भी पढ़ें… गाड़ियों के VIP नंबर अलॉटमेंट मामले में RTO निलंबित:पुराने 7 डिजिट के नंबर अलॉट हो रहे थे; जांच में विभाग के कर्मचारियों के शामिल होने का अंदेशा VIP नंबरों के अलॉटमेंट में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद दौसा RTO जगदीश अमरावत को निलंबित कर दिया गया है। 7 डिजिट नंबरों को लेकर विभाग में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसमें विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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