करौली में अनुसूचित जातियों के उप वर्गीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण रैली का आयोजन किया गया। वंचित वर्ग आरक्षण उप वर्गीकरण संघर्ष समिति राजस्थान के बैनर तले आयोजित इस रैली में सर्वोच्च न्यायालय के 1 अगस्त 2024 के निर्णय के क्रियान्वयन की मांग की गई। प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान विकास नरवार के नेतृत्व में संघर्ष समिति का रथ भरतपुर से करौली जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। वहां तहसीलदार महेंद्र गुर्जर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान प्रदेश संयोजक अरविंद भील, करौली अध्यक्ष ग्यारसा वाल्मिकी, पार्षद संदीप और प्रदेश यात्रा संयोजक जितेंद्र समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। समिति ने विशेष रूप से वाल्मीकि, मेहता, सांसी, कंजर, नट, ढोली, बाजीगर, सपेरा, मदारी, कालबेलिया, बाबरी, भांड, धानक और कामड जैसी जातियों के लिए तत्काल आरक्षण की मांग की है। इन समुदायों को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा माना जाता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए 12 जनवरी 2025 से भरतपुर से एक विशेष रथ यात्रा का शुभारंभ किया गया है। यह यात्रा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों, तहसील मुख्यालयों और गांवों तक जाएगी, जिसका समापन अप्रैल में जयपुर में होगा। प्रदेश अध्यक्ष विकास नरवार ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार को एक विशेष कमेटी का गठन कर इन पिछड़ी जातियों की पहचान करनी होगी। यह कमेटी इन समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन कर आरक्षण के लिए उचित सिफारिशें करेगी। इस दौरान वंचित वर्ग आरक्षण उप वर्गीकरण संघर्ष समिति राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष विकास नरवार, रथ यात्रा मुख्य समन्वयक जितेन्द्र कैलादेवी, प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश धामोनिया, लोकसभा संयोजक बाबूलाल डागर, रवि, करौली शहर अध्यक्ष ग्यारसी, मुन्ना अशोक, अजय, प्रकाश, पार्षद संदीप आदि शामिल रहे


