SDM-प्रधान के बीच तीखी बहस, मेरी कोई सुनता नहीं:एसडीएम बोले- इस्तीफा दें दों, बिजलाराम ने कहा- चमचे और एजेंट बैठा रखें है

बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी एसडीएम और प्रधान के बीच शुक्रवार को तीखी बहस हो गई। प्रधान ने कहा मेरी पंचायत समिति में कोई सुनता नहीं है। वहां पर चमचे और एजेंट बैठा रखे है। एसडीएम ने कहा कि आप इस्तीफा क्यूं नहीं देते हो। फिर प्रधान ने कहा कि कितनी ज्ञापन दिया आप मिठ्‌ठी गोली दे देते हो। दरअसल, किसान सघर्ष समिति गुड़ामालानी के बैनर तले प्रधान बिजलाराम, किसान अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन देने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान प्रधान और एसडीएम के बीच तकरार हो गई। दरअसल, किसानों साल 2022 का आदान-अनुदान, फसल बीमा क्लेम, बिजली समस्या समेत 11 मांगों को लेकर शुक्रवार को गुड़ामालानी एसडीएम ऑफिस ज्ञापन देने के लिए पहुंचे। वहीं पर किसान, प्रधान और जनप्रतिनिधि वहीं पर धरने बैठ गए। इस दौरान एसडीएम और किसानों के बीच बातचीत हुई। इस दौरान प्रधान बिजलाराम और एसडीएम केशव मीणा के बीच में तीखी बहस हो गई। इस दौरान किसानों ने एसडीएम को खूब खरी-खोटी सुनाई। एसडीएम ने कहा कि मेरी क्षमता में जो काम होंगे वहीं कर पाऊंगा, आप कह दो कि आसमान में तारे तोड़कर ले आओ, वो मैं ला नहीं सकता हूं। प्रधान और किसानों ने कहा कि आप मीठी गोलिया और लॉलीपॉप देते हो। इस पर एसडीएम भड़क गए कि मैंने क्या मीठी गोली दी। आपकी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए मैंने पचासों लेटर लिखे है। एसडीएम- प्रधान हो आप पंचायत समिति के। प्रधान- आप लेटर लिखो। एसडीएम- आप लिख दो लेटर। प्रधान- मैंने तो लिखे है आपने एक भी लेटर का जवाब नहीं दिया। एसडीएम- मैने तो लिखा है। प्रधान- उसका उतर दो, मैंने बार-बार लेटर दिए है उसका उतर दो। एसडीएम- प्रधान आप हो पंचायत समिति के धनी आप हो। प्रधान- मैंने आपको लेटर दिया उसका उतर दिया क्या? फालतू गोली देते हो यार एसडीएम- क्या गोली देते है। प्रधान- मैंने लेटर लिखें उसका एक भी उतर दिया आपने एसडीएम- उतर आएगा तभी दो दूंगा। प्रधान- कब दोंगे लेटर का जवाब। लेटर का उत्तर नहीं देते हो और फालतू बोल रहे है। एसडीएम- सुअर का काम तो आपका है। प्रधान- सुअर का काम (खेतों में सुअरों का आतंक रोकने) नहीं मानते है आप लेटर लिखों। एसडीएम- प्रधान कह रहे है कि मेरी मानते है। गजब आदमी है। प्रधान- नहीं मानते है तभी तो कह रहा हूं एसडीएम- क्यूं हो प्रधान इस्तीफा दें दो आप। प्रधान- इस्तीफा ही है। एसडीएम- प्रधान कह रहा है कि मेरी पंचायत समिति में चलती नहीं है। प्रधान- नहीं चलती है तभी तो आपके पास आ रहे है। एसडीएम- पॉवर प्रधान के पास है काम करना है। प्रधान- भाईसाहब मैं कह रहा हूं कि वहां पर चमचे और एजेंट बैठा रखे है। हम एसडीएम है लेटर लिखिए। एसडीएम- मैंने तो लेटर लिखे है। प्रधान- उसका उत्तर कहां पर दिया। बहुत लेटर दिए है। एसडीएम- हमने भी खूब लेटर लिखें है। प्रधान- मैं आपको लेटर देता हूं आप आगे लिख देते हो। एसडीएम- जो आप सोच कर आए हो वो करना है जो काम करने मैं सक्षम हूं वहीं हम करेंगे। प्रधान- क्या करना है, आप दो घटें से कहे रहे हूं आपके पास इसके उत्तर हो तो दे दों। एसडीएम- आपको समझना नहीं है। नहीं समझ रहे हो। आप पहले समझदार हो आपको क्या समझाएं आपको। प्रधान- हमने लेटर दिए है यह मेरा नहीं है। हमने यह कहा आपके पास जो है उसका समाधान कर दो, अन्य काम के लिए लेटर लिख दो। एसडीएम- मैंने यह कहा कि जो मेरे क्षमता है मैं यहां पर करता हूं। जो नहीं उसके लिए लेटर लिख देंगे। आप कह रहे हो मिठ्‌ठी गोली दे रहे हो, इसमें मिठ्‌ठी गोली क्या है। प्रधान- दीपावली से पहले धरना स्थल पर 15 दिन में आदान-अनुदान दिलाने कहा था।ञ एसडीएम- मेरे हाथ में है क्या? पैसे डालना मेरे हाथ में क्या प्रधान- यहां पर एसडीएम होते हुए आपके सामने धुल उड़ रही है। एसडीएम- मेरे हाथ में है क्या बजट डालना। प्रधान- आप यहां से लिख तो सकते हो। एसडीएम- मैंने 50 लेटर लिख रखें है। मिठ्‌ठी गोली देते हो। मेरी ओटीपी से रुपए ट्रांसफर हो जाएंगे। प्रधान- आप कब से मिट्‌ठी गोली दे रहे हो। लॉलीपॉप देना। अब तो आप जाओंगे। एसडीएम- जाएंगे कब से मिठ्‌ठी गोली… मिठ्‌ठी गोली लगे हुए हो। मिठ्‌ठी गोली आप देते हो। प्रधान- आप ऐसा काम करों कि किसान आपको याद करें अच्छा अधिकारी आया था और अच्छा काम करके गया था। एसडीएम- हमारा काम चुनाव लड़ना नहीं है हमे हमारा नाम नहीं करवाना है। हम हमारा काम कर रहे है। मैं काम करके किसी पर अहसान नहीं कर रहा हूं। हमारी ड्यूटी है। बात करने का तरीका होता है। अरे भाई जो मेरी क्षमता में होगा वहीं काम करूंगा। आप कह रहे हो कि चांद लाकर मेरे को दे दो मैं कहां से लाकर दूंगा। आप करते हो ऐसी। एसडीएम ने किसान के संघ के पदाधिकारी को कहा- आप मेरी बात सुनों, इमानदारी से बताओं प्रधान- हम इमानदारी से कह रहे है। किसान संघ पदाधिकारी- इमानदारी से कहना हूं कि यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। दो माह पहले दो हजार किसानों की उपस्थिति में कहा था यह पर्यटक विभाग की जमीन है और वहां पर पट्‌टे है। आपकी दो बातें आ गई साहब। एसडीएम- मेरी बात सुनों अगर नियम के विरूद्ध है तो उसको मैं तोडूंगा। आप दो बात मत करों। एक बात करों अगर आप वास्तव में इंसान हो तो एक बात करों। प्रधान को आप बीच में मत बोलों मैं इनसे बात कर रहा हूं। एक आदमी से बात कर रहा हूं। बीच में बोलने का शौक है। किसान पदाधिकारी- एक पैमाइश करनी थी दो साल से भटक रहे है। आप से पैमाइश नहीं होती है क्या? सरकारी जमीन थी। जमीन आवंटन करते है उसकी रक्षा करता है। आपने कैसी रक्षा की। पर्यटन विभाग, केवीके की जमीन की रक्षा नहीं हो पाई, किसान रोज आते है ज्ञापन देकर चले जाते है। यहां की पूरी सरकार आप है। आपकी कौनसी क्षमता नहीं है। दो साल पहले काम हो रहा था वह बंद हो गया। होता हुआ काम बंद हो गया आपकी क्षमता से बाहर कैसे हो गया। एसडीएम – कौनसे काम बंद हो गए किसान पदाधिकारी- पानी जा रहा था वो बंद, नर्मदा का पानी आ रहा था वो बंद हो गया। एसडीएम- पूरे फील्ड में जो समस्या हो रही है वो मेरी वजह से हो रही है क्या? किसान पदाधिकारी- आप मॉनिटरिंग करते एसडीएम – हम अच्छी मॉनिटरिंग कर रहे है। किसान पदाधिकारी- तो हम लोग क्यूं आते, वहां खड़े किसानों से पूछा कि आप शौक आए हो क्या। एसडीएम- कोई सुनने को राजी नहीं है। प्रहलाद जी बोल रहे है। बीच में बोले प्रधान को डांटने हुए कहा कि बीच क्यूं बोल रहे हो। प्रधान- कौनसा बीच में बोल रहा है। एसडीएम आराम से करो नेतागिरी। प्रधान- नेतागिरी आज दिन तक नहीं की है। ईमानदारी से कह रहा हूं। कभी राजनीति नहीं की है। एसडीएम करो ना, प्रधान जी जब सबको कह रहा हूं तो आप चुप क्यूं नहीं रहते हो। बाद में बोल दो प्रधान- हम बीच में नहीं बोल रह है हम तो कह रहे है कि एसडीएम के अधिकार है उस कर्तव्य को पूरा करों। किसान – बात तो सिर्फ मुख्य किसान आदान-अनुदान की है। दीपावली से पहले धरना दिया था, तब कहा था आपके दीपावली करवा देंगे। राशि आ जाएगी। किसान यहां पर तीन दिन तक बैठे रहे। आगे-आगे समय देने पर किसानों को लगता है कि गुमराह क्यूं हो रहे है। एसडीएसम साहब आप हमारे दुश्मन नहीं हो। आपके लेवल की है तो ठीक, नहीं तो यह कह दो कि मेरे लेवल की नहीं है। एसडीएम- किसान ताजाराम से पूछा कि आप ही बताओं आदान-अनुदान का पैसा किसके लेवल का काम है। किसान- आपसे नहीं हो रहा है तो आप हाथ जोड़ लो, एसडीएम – आप गोली मत दो, सीधे बोलों। एसडीएम साहब की ओपीटी से पैसा जाएगा क्या किसकी ओटीपी से जाएंगे? किसान- इसके लिए जिम्मेदार कोन है। ओटीपी तो कलेक्टर साहब की भी नहीं लगती है। एसडीएम – मैं जिम्मेदार हूं क्या, इसके जिम्मेदार कौन है किसान- सरकार जिम्मेदार है आप सरकार के यहां पर सबसे बड़े अधिकारी है। बात इतनी सी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। एसडीएम- सीधी बात बताओं की क्या एसडीएम की लापरवाही से आपका पैसा नहीं आ रहा है। बताओ किसान पदाधिकारी- आपने अपने मुंह से बोला था। एसडीएम- सीधा बोलों, घुमाओ नहीं। किसान पदाधिकारी- आपने मुंह से बोला था, आपने कहा था कि 15 दिन में आ जाएगा, लेकिन दो माह से नहीं आया। फिर जिम्मेदार कोन है। अगर 15 दिन में नहीं आएगा तो आपने लॉलीपॉप क्यूं दिया। एसडीएम- मैंने जो ऊपर बात की वो मैंने आपको बता दी, 15 दिन तक मेरे पास पेडिंग रहा है तो आप मुझे आराम से जो कहना है वो कहाे। कोई दिक्कत नहीं है। किसान- आपकी कोई दुश्मनी नहीं है क्यूं आपको कुछ कहें। इनपुट : रमेश गौड़

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