सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के कोर जोन चूरना क्षेत्र को आखिरकार शनिवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। सुबह से ही जंगल सफारी के लिए जिप्सियां रवाना हुईं। पहले दिन भीमकुंड गेट पर रेंजर आरपी पाठक ने पर्यटकों का माला और गुलाब फूल देकर स्वागत किया और मिठाई खिलाकर जंगल सफारी के लिए विदा किया। बारिश के कारण मढ़ई अभी बंद, 11 अक्टूबर से शुरू होगी सफारी चूरना में तो सफारी शुरू हो चुकी है, लेकिन मढ़ई गेट अभी पर्यटकों के लिए बंद है। तेज बारिश और खराब रास्तों की वजह से यहां सफारी संभव नहीं हो पा रही है। एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि मढ़ई क्षेत्र में 11 अक्टूबर से सफारी शुरू की जाएगी, तब तक मरम्मत का काम जारी रहेगा। बच्चियों ने किया गेट का पूजन जंगल खुलने के पहले दिन भीमकुंड गेट पर बच्चियों से पूजन करवाकर प्रतीकात्मक रूप से गेट खुलवाया गया। इस दौरान बोरी रेंज के सहायक संचालक विनोद वर्मा भी मौजूद रहे। चूरना की सड़कें हुईं ठीक, सफारी बुकिंग फुल लगातार बारिश के बाद चूरना के भीमकुंड, मल्लुपुरा और पनारपानी की सड़कें अब सफारी के लिए तैयार हैं। तीन दिन से बारिश नहीं होने के कारण कीचड़ की स्थिति सुधरी है, जिसके बाद सफारी शुरू की गई। पर्यटकों ने एसटीआर की वेबसाइट पर जिप्सी बुकिंग की होड़ लगा दी है। 10 अक्टूबर तक अधिकांश सफारी स्लॉट फुल हो चुके हैं। मल्लुपुरा और भीमकुंड में सुबह-शाम की लगभग सभी बुकिंग हो गई हैं, कुछ ही स्लॉट बाकी हैं। पहली बुकिंग वालों को रिफंड, अब फिर से हो रही बुकिंग जिन पर्यटकों ने 1 अक्टूबर से पहले ही ऑनलाइन बुकिंग कर ली थी, लेकिन बारिश के कारण सफारी नहीं हो सकी, उन्हें रिफंड दिया गया है। अब नए सिरे से बुकिंग जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में पर्यटक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। एसटीआर में 70 से अधिक बाघ, 2.80 लाख पहुंचे थे पर्यटक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 70 से अधिक बाघ, 233 बारहसिंगा, बायसन, तेंदुआ, मोर जैसे कई वन्यप्राणी हैं। पिछले साल करीब 2.80 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे। टाइगर रिजर्व का बफर जोन सालभर खुला रहता है, जबकि कोर जोन हर साल 1 जुलाई से 30 सितंबर तक बारिश के चलते बंद कर दिया जाता है। अब तय होगा कि पर्यटकों को पहले किन बीटों पर ले जाया जाएगा फिलहाल तवा डेम का बैक वॉटर जंगल में मौजूद है। इसके चलते एसटीआर प्रबंधन जल्द तय करेगा कि कौन-कौन सी बीट पर सफारी कराई जाएगी। इस निर्णय के बाद सफारी का अनुभव और भी बेहतर हो सकेगा।


