UGC के विरोध में सड़क पर उतरा सवर्ण समाज:टायर जलाया, बोले, जातिगत आरक्षण ही इस एक्ट की जननी, वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी

UGC के नए प्रावधान के विरोध में समता आंदोलन के साथ सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में सीएडी ग्राउंड पर इकट्ठा हुए। वहां से रैली के रूप में संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे। जहां टायर जला कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर इस कानून को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने एवं संशोधन करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में कोटा की में चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी। वक्ताओं ने कहा इस कानून में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। आरोपी को पहले ही दोषी मान लिया जाता है। जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे निर्दोष लोगों को मानसिक, सामाजिक और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। समता आंदोलन के संभागीय अध्यक्ष डॉ अनिल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी एक्ट लाया गया। यह काला कानून है। इससे समाज में भेदभाव बढ़ेगा। जातिगत आरक्षण ही इस एक्ट की जननी है। जातिगत आरक्षण का विरोध हम समय-समय पर करते रहते तो किसी सरकार की दम नहीं थी कि यह एक्ट ला देते। सवर्ण समाज के बड़े बड़े कार्यक्रम होते है। एक भी कार्यक्रम में समाज के नेता,जातिगत आरक्षण का विरोध नहीं करते। इसी वजह से सरकारों के पास यह संदेश नहीं जाता की सवर्ण समाज नाराज है। अगर सवर्ण समाज के समाजों से जातिगत आरक्षण का विरोध होने लग जाए तो किसी सरकार की ताकत नहीं है की ऐसा एक्ट लागु कर दें। इसलिए सभी समाजों से अपील है कि जब भी आपके समाज में कार्यक्रम हो, उसमें जातिगत आरक्षण का खुलकर विरोध करें। अनिल तिवारी ने कहा-सबका साथ, सबका विकास की बात करने वाली सरकार UGC कानून के तहत विद्या के मंदिर में दरार डालना चाहती है। हमारी मांग है कि सरकार यूजीसी कानून को तुरंत समाप्त करें। सवर्ण समाज के लोग सरकार बना सकते हैं, तो सरकार का काम बिगड़ भी सकते हैं। यह सनातन हिंदू समाज को तोड़ने की सबसे बड़ी साजिश है।

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