भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ प्रदेशभर में वाहनों के वीआईपी नंबर हासिल करने के लिए हुए फर्जीवाड़े में चित्तौड़गढ़ जिले में भी पहला मामला अब पुलिस में दर्ज हो गया है। खुद परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर ने सदर थाने में दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। एएसआई एवं अनुसंधान अधिकारी शंकरलाल के अनुसार एफआईआर आरटीओ चित्तौड़गढ़ के निरीक्षक किशनलाल तेली ने दर्ज करवाई है। इसके अनुसार कुछ गाड़ियों के ऑनलाइन रिकॉर्ड और आरटीओ कार्यालय में संधारित मूल रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया है। गाड़ी संख्या आरएसएच 5656 आरटीओ कार्यालय के ऑनलाइन पंजीयन रिकॉर्ड में जीप के रूप में दर्ज है और इसका मालिक कुंभानगर चित्तौड़गढ़ निवासी राजेश कुमार पुत्र गणपत है। लेकिन आरटीओ के मूल रिकॉर्ड की जांच की तो सामने आया कि यह गाड़ी जीप नहीं बल्कि ऑटो रिक्शा है। जिसका असली पंजीकृत मालिक दलीचंद पुत्र छोगालाल सदर बाजार है। आरोप है कि राजेश कुमार ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऑटोरिक्शा को कार की श्रेणी में ऑनलाइन दर्ज करवा दिया, ताकि वीआईपी नंबर हासिल किया जा सके। इसी तरह गाड़ी संख्या आरजेएच 0258 ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार रूपसिंह पुत्र कानसिंह निवासी कुंभानगर के नाम से पंजीकृत है। बैकलॉग के दौरान अपलोड किए गए पंजीयन प्रमाण पत्र को देखने पर उसमें गाड़ी मालिक मूलचन्द्र पुत्र सेवाराम, निवासी नीमच (मध्यप्रदेश) दर्ज पाया गया। जांच में सामने आया कि बैकलॉग प्रक्रिया में षड्यंत्रपूर्वक कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। गाड़ी को ऑटो की जगह कार के रूप में ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया। यानी गाड़ी का प्रकार व पंजीकृत स्वामी दोनों ही बदल दिए गए। पुलिस जांच से सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क बैकलॉग के जरिये वीआईपी नंबरों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने पर विभाग ने पूरे प्रदेश में विभागीय जांच करवाई। चित्तौड़गढ़ जिले में भी ऐसे करीब तीन चार दर्जन वाहनों की जांच चल रही। पहली एफआईआर दो वाहन स्वामियों राजेश कुमार व रूपसिंह के खिलाफ दर्ज हुई। पुलिस जांच शुरू होने से पूरे नेटवर्क सहित फर्जीवाड़े की तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। पुलिस जांच करेगी कि फर्जी दस्तावेज कहां से बनाए गए, बैकलॉग प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और कितने वीआईपी नंबर इस तरीके से हासिल किए गए। परिवहन विभाग ने कुछ गाड़ियों पर पहले ही कार्रवाई कर दी है।


