अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने मंगलवार को जबलपुर के घंटाघर चौराहे पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को बचाने का आरोप लगाया है। महिलाओं ने उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की है कि जिन प्रभावशाली लोगों के नाम दबाए गए हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए और तत्काल गिरफ्तारी हो। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि अब जबकि भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी पत्नी उर्मिला सनावर के बीच हुई बातचीत का ऑडियो-वीडियो वायरल हो चुका है, तब यह स्पष्ट है कि जिस कथित वीआईपी का नाम जांच में छिपाया गया, वह कोई और नहीं बल्कि भाजपा महासचिव 68 वर्षीय दुष्यंत गौतम हैं। एडवोकेट अंजना कुररिया ने आरोप लगाया अंकिता हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। यदि समय रहते कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई होती, तो शायद अंकिता को न्याय मिल सकता था। मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड
सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश में वनतारा रिसोर्ट में काम करने वाली 18 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव नहर में फेंक दिया गया था। जांच के दौरान उत्तराखंड पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जिस वनतारा रिसोर्ट में अंकिता काम करती थी, वह भाजपा नेता विनोद आर्य का बताया गया, जो उस समय माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष थे और मंत्री का दर्जा प्राप्त था। अंकिता की हत्या के बाद भारी जनआक्रोश के बीच रिसोर्ट को जमींदोज कर दिया गया था। आरोप है कि इस दौरान सबूत मिटाने की साजिश रची गई। शुरुआत से ही इस मामले में आरोप लगते रहे कि किसी वीआईपी गेस्ट को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने का दबाव अंकिता पर बनाया जा रहा था। इंकार करने पर उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि, जनता के दबाव में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन कथित वीआईपी गेस्ट के नाम की जांच नहीं की गई और उसे दबा दिया गया। महिलाओं ने रखीं ये मांगें


