भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब सरकार ने तहसीलों में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सीसीटीवी कैमरों से लैस करने का आदेश जारी किया है। साथ ही ऐसी जगह पर कैमरे का फोकस रखने को कहा गया है, जहां से गड़बड़ियां की जाने की संभावनाएं अधिक होती हैं। खासतौर पर सब-रजिस्ट्रार और रजिस्ट्री क्लर्क (आरसी) कैमरे की रडार में रहेंगे। जारी आदेश के मुताबिक, कैमरे का फोकस सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में लगे टेबल पर होना चाहिए। दरअसल, टेबल के नीचे से लेन-देन हमेशा ही चर्चा में बना रहा है। कई बार अफसर दफ्तरों में नहीं होते तो मुलाजिम ही टेबल के नीचे से खेल कर जाते हैं। यदि कैमरे का फोकस इस जगह पर रहा तो यह खेल खत्म हो जाएगा। आदेशों के मुताबिक, जिस कैमरे का फोकस टेबल के नीचे रखा जाए उसका नाम सिस्टम में तहसील के नाम के साथ एसआरओ दिया जाए। वहीं रजिस्ट्री क्लर्क के पूरे कमरे में कैमरे का फोकस होना चाहिए। इस कैमरे का नाम तहसील नाम आरसी देना होगा। तीसरे कैमरे का फोकस उस कर्मचारी पर रखना होगा, जो तस्दीक दस्तावेजों को संबंधित मालिकों को हैंडओवर करता हो। ताकि कोई भी मुलाजिम गड़बड़ी न कर सके। इस कैमरे का सिस्टम नेम आरसी-2 होना चाहिए। चौथे कैमरे का फोकस पब्लिक वेटिंग एरिया में रखना होगा। इसका नाम वेटिंग दिया जाए। बता दें कि सरकार ने घूसखोरी पर नकेल कसने के लिए हर तरह के इंतजाम तो करा रही है लेकिन मुलाजिमों ने इन सबका तोड़ तो पहले ही निकाल रखा है। चूंकि जो मुलाजिम रजिस्ट्री दफ्तरों में सेटिंग करते हैं, वह सीट पर देरी से बैठते हैं। रजिस्ट्री क्लर्क बिजी रहने के कारण कई बार बाहर नहीं निकल सकता। वह सीधे सब-रजिस्ट्रार के आस-पास रहता है, जबकि स्टे क्लर्क व दूसरे क्लर्क और मुलाजिम अलग-अलग बहाने बनाकर कई बार सीट छोड़ते हैं। इसके बाद बाहर पार्टियों से सेटिंग कर वापस सीट पर आ जाते हैं। दरअसल, स्टे क्लर्क का काम दस्तावेजों में यह चेक करना होता है कि कोर्ट से कोई स्टे तो नहीं लगा हुआ है। इसके बाद इसे आगे बढ़ाते हैं। मौका मिलते ही रजिस्ट्री दफ्तर से बाहर या फिर जिस जगह पर सीसीटीवी कैमरे का फोकस नहीं वहां निकल जाते हैं। अपने सीट की बजाय बाहर पार्टियों से डील करते दिख जाएंगे।


