अंधड़ से तबाही: गांवों में पहुंचकर आज नुकसान का करेंगे मुआयना

भास्कर न्यूज | बालोद शनिवार को देर रात आंधी-तूफान का सिलसिला थमने के बाद रविवार को तबाही का मंजर दिखा। बालोद के गंजपारा मंे कार के ऊपर बोर्ड, फ्लैक्स गिर गया। जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर सिकोसा की नर्सरी में लगे ग्रीन नेट हाउस उड़ गए। इसके अलावा विभिन्न किस्म के पौधे नष्ट हो गए। जिससे लगभग दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है। अर्जुन्दा निवासी गोविंदा पटेल ने बताया कि शनिवार शाम को अचानक आंधी-तूफान की वजह से ग्रीन नेट हाउस उड़ने के अलावा विभिन्न किस्म के पौधे नष्ट हुए हैं। बालोद-दुर्ग मुख्य मार्ग में सिकोसा के पास 3 एकड़ में नर्सरी तैयार कर आम, कटहल, अनार, नीबू सहित गुलाब फूल व कई प्रकार के अन्य फूल व पौधे मंगाकर रखे थे। तेज हवा चलने से अधिकांश पौधों को नुकसान हुआ है। रविवार को जब नर्सरी पहुंचा तब तबाही का मंजर दिखा। जिसके बाद नुकसान होने की सूचना क्षेत्र के पटवारी को दिया हूं। राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि जहां-जहां नुकसान हुआ है, वहां क्षेत्र के पटवारी, आरआई आकलन करने सोमवार को पहुंचेंगे। अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि अंधड़ तूफान से जिन क्षेत्रों में नुकसान हुआ है, वहां सर्वे करने संबंधित एसडीएम, तहसीलदार को निर्देश देंगे। आंशिक क्षति होने पर 4 हजार देने का प्रावधान जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ गिरने, टीना शेड, छप्पर उड़ने से कई लोगों को नुकसान हुआ है। हालांकि कितने लोग प्रभावित हुए है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है क्योंकि पटवारियों के माध्यम से अब तक तहसील कार्यालय मंे रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। बालोद के तहसीलदार आशुतोष शर्मा ने बताया कि मकान आंशिक क्षति पर 4 हजार रुपए का देने का प्रावधान है। पूर्ण क्षति होने पर लगभग एक लाख देने का प्रावधान है। पटवारियों के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित लोगों के सहायता के लिए आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नुकसान 33% से ज्यादा तो सहायता राशि देंगे राजस्व विभाग के अनुसार आरबीसी 6-4 के तहत फसल नुकसान होने पर मुआवजा सहायता राशि देने का प्रावधान है। हालांकि इसके लिए 33 प्रतिशत लिमिट तय की गई है। भले ही बारिश हुई है, अंधड़ तूफान से फसल झुक गई है लेकिन कहीं भी 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने की खबर नहीं मिली है। भले ही गर्मी सीजन में धान लगाने पर शासन, जिला प्रशासन की ओर से मनाही की जाती है लेकिन नुकसान होने की स्थिति में आरबीसी के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग की ओर से गर्मी सीजन में दलहन-तिलहन फसल की खेती करने प्रोत्साहित किया जाता है।

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