छोटीसादड़ी क्षेत्र में अम्बावली गांव के अंतिम कुमार जैन ने फिलीपींस का सॉफ्ट किस्म का गन्ना बोया है। एक ही पौधे का बीज बढ़ाते-बढ़ाते अब वे आधे बीघा में गन्ने की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि यह साधारण गन्ने के मुकाबले ज्यादा सॉफ्ट है। इस कारण बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर दांत वाले भी इसे आसानी से खा सकते हैं। रस की मात्रा, ज्यादा मीठा होने से बाजार में इसकी ज्यादा मांग है। तीन साल पहले वे फिलीपींस वैरायटी का एक गन्ना 500 रुपए में खरीदकर लाए थे। धीरे-धीरे बीज बढ़ाकर उन्होंने आधा बीघा में इसकी खेती शुरू की। ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए वे गन्ने का बीज लोगों काे बेचते भी हैं। वे बताते हैं कि एक बार बोने के बाद तीसरी फसल तक गन्ने की मोटाई और रस दोनों बढ़ जाते हैं। यह गन्ना हाथ से आसानी से छील सकते हैं। इसकी खेती जैविक तरीके से कर रहा हूं। सिर्फ देसी पद्धति और पौधों की पत्तियों से बनी खाद ही डालता हूं। गन्ना जैविक होने के कारण लोगों में इसकी मांग रहती है। अब इसी मॉडल पर आगे बढ़ते हुए नई वैरायटी गोल्डन शेड गन्ने को भी बोने पर काम कर रहे हैं। यह नई किस्म अगले साल बड़े स्तर पर गांव में दिखाई देगी और इससे आय और बढ़ सकती है। वे किसानों को इस वैरायटी की बुवाई करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों को इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित करना शुरू किया है। वे बताते हैं कि मेवाड़ की मिट्टी गन्ने की खेती के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त है। क्योंकि यहां पहले बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती रही है। गन्ना किसी भी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है। केवल अत्यधिक रेतीली मिट्टी में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है। सिंचाई की जरूरत हर 15 दिन में होती है जबकि बारिश के मौसम में अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। नई भूमि पर ही बीज की आवश्यकता होती है। अन्यथा गन्ने की कटिंग से आसानी से फसल तैयार की जा सकती है। हाइब्रिड या प्रयोगात्मक किस्मों के लिए बीज का उपयोग किया जाता है।


