तेलंगाना की जिस फैक्ट्री में काम करने के बाद छत्तीसगढ़ के लोग सिलिको टीबी से पीड़ित हुए, उसे लेकर एक और खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की 5 सदस्यीय जांच समिति ने रिपोर्ट में बताया है कि दंतेवाड़ा के मजदूर तेलंगाना की जिस पत्थर फैक्ट्री में काम कर रहे थे, वह सिलिकोसिस प्रोन थी। फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों के स्वास्थ्य की निगरानी का कोई सिस्टम नहीं था। फैक्ट्री में काम के अधिकतम घंटे तय नहीं थे। इसके चलते मजदूरों को घंटे तक की लंबी ड्यूटी करना पड़ती थी। फैक्ट्री में लेबर लॉ के अनुसार मजदूरों को हफ्ते में एक दिन की छुट्टी भी नहीं दी जाती थी। सरकारी रिकाॅर्ड में मजदूरों को हफ्ते में एक दिन की छुट्टी दिए जाने की औपचारिकता पूरी करने हाफ डे लीव दी जाती थी। समिति ने यह जांच रिपोर्ट रायपुर के अंबेडकर हॉस्पिटल में भर्ती दंतेवाड़ा के 9 सिलिकोसिस पीड़ित मजदूरों के बयानों के आधार पर बनाई है। जिले के अलग–अलग गांवों से 37 मजूदर तेलंगाना की पत्थर फैक्ट्री में काम करने गए थे। मजूदरों का रायपुर में इलाज दंतेवाड़ा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश लौटने वाले सभी 37 मजदूरों की मेडिकल जांच कराई है। जांच में 12 मजदूर बीमार निकले थे। इनमें से 9 को रायपुर रेफर किया गया था, जहां इन मजदूरों को सिलिको टीबी होने की बात सामने आई है। शेष तीन मरीज टीबी संक्रमित निकले हैं। सभी को जरूरी इलाज दिया जा रहा है।


