श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार व सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उन्होंने याचिका में SGPC (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) पर आरोप लगाया है कि राजनीतिक खींचतान के चलते उन्हें मार्च 2025 में जत्थेदार पद से हटाया गया और वर्तमान पद की गरिमा को खतरा है। उनके इस कदम का दिल्ली अकाली दल प्रधान परमजीत सिंह सरना ने विरोध जताया है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने याचिका में आग्रह किया है कि उन्हें 7 मार्च 2025 को श्री अकाल तख्त के जत्थेदार पद से हटा दिया गया, और इसके बाद उन्हें सच्चखंड श्री दरबार साहिब अमृतसर (गोल्डन टेंपल) का मुख्य ग्रंथी नियुक्त किया गया। दरबार साहिब को सिख धर्म का प्रतीक माना जाता है, और यह पद धार्मिक दृष्टि से अत्यंत सम्मानजनक है। उन्होंने मांग रखी है कि उनके वर्तमान धार्मिक पद की गरिमा और पवित्रता की रक्षा की जाए। उनका कहना है कि SGPC के भीतर चल रही राजनीतिक उठा-पटक का सीधा असर धार्मिक संस्थानों पर पड़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। सरना ने कहा “गुरमत मर्यादा का उल्लंघन” दिल्ली अकाली दल के प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने इस याचिका पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि एक धार्मिक पदाधिकारी का इस तरह सांसारिक अदालत में जाना गुरमत परंपरा और मर्यादा के खिलाफ है। सरना ने टिप्पणी की कि जिस ओहदे में कोई सेवा कर रहा है, पहले उसे उस पद के इतिहास को जानना चाहिए। बाबा बुद्धा साहिब और भाई मणी सिंह जैसे महापुरुषों ने इस पद को अपनी सेवा और बलिदान से ऊंचाई दी है। ऐसे में किसी भी धार्मिक हस्ती को इस पद की गरिमा और सिद्धांतों को तार-तार करने का कोई अधिकार नहीं। पंथ का प्रतिष्ठित पद कठघरे में उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघुबीर सिंह का कोर्ट जाना केवल व्यक्तिगत असंतोष नहीं, बल्कि उन्होंने पूरे पंथ के प्रतिष्ठित पद को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इससे न केवल उनके ओहदे की मर्यादा, बल्कि उनकी अपनी छवि भी धूमिल हुई है। सरना ने SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने मांग रखी है कि जब किसी ने स्वयं को कोर्ट के कठघरे में खड़ा कर दिया है, तो उसे धार्मिक सेवा से हटाकर प्रशासनिक ड्यूटी में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।


