अकाल तख्त ने हरिंदर सिंह खालसा पर प्रतिबंध हटाया:विदेशों में धार्मिक समागमों की शुरुआत, बोले-अंग्रेजी में भी समझाए जा रहे गुरबाणी का अर्थ

अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा प्रचार संबंधी प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भाई हरिंदर सिंह खालसा ने विदेशों में बड़े स्तर पर धार्मिक समागम शुरू कर दिए हैं। दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर विदेशी धरती पर गुरबाणी का प्रचार किया गया। इन समागमों की एक मुख्य विशेषता यह है कि भाई हरिंदर सिंह खालसा पंजाबी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी गुरबाणी का प्रचार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी को सिखी से जोड़ना है, जो पंजाबी पढ़ने या समझने में असमर्थ है। बच्चों और युवाओं को गुरु से जोड़ने के लिए गुरबाणी के अर्थ अंग्रेजी में भी समझाए जा रहे हैं। 8 दिसंबर को हटाया गया था प्रतिबंध गौरतलब है कि कुछ समय पहले श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के तहत भाई हरिंदर सिंह खालसा (यूके) पर प्रचार संबंधी प्रतिबंध लगाया गया था। इस मामले पर 8 दिसंबर 2025 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह रोक हटा दी गई थी। इसके उपरांत, भाई साहिबान अब विभिन्न देशों में पंजाबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में धर्म प्रचार कर रहे हैं। थाईलैंड में एक धार्मिक समागम के बाद भाई हरिंदर सिंह खालसा ने कहा कि देश-विदेश में रह रही नई पीढ़ी को गुरु से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से कथा, कीर्तन और गुरबाणी के अर्थ अंग्रेजी में भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सौंपी गई सेवा को पूर्ण करने के बाद अब विभिन्न देशों में बड़े स्तर पर धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में संगत पहुंच रही है।

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