अक्षय तृतीया : 65 साल बाद गजकेसरी, लक्ष्मी नारायण योग, मालव्य राजयोग

भास्कर न्यूज | अमृतसर अक्षय तृतीया अब की बार बहुत ही खास होने वाली है। अक्षय तृतीया पर 65 साल बाद गजकेसरी, लक्ष्मी नारायण योग और मालव्य राजयोग बन रहे हैं। इस दिन वृषभ राशि में गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा तो मीन राशि में शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बनेगा। पंडितों के मुताबिक इस दिन मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है और दीवाली जैसी लक्ष्मी पूजा का प्रभाव होता है। जिससे आर्थिक उन्नति को मजबूत किया जा सकता है। वहीं पंडितों के अनुसार इस दिन दान, दक्षिणा, हवन यज्ञ करके खरीदारी करना अति उत्तम होगा। रानी का बाग माडल टाउन की गली नंबर 3 स्थित गोल्ड मेडलिस्ट ज्योतिषाचार्य पंडित राम अवतार के अनुसार अक्षय तृतीया का यह संयोग 65 साल बाद गजकेसरी, लक्ष्मी नारायण योग और मालव्य राजयोग बन रहे हैं। इस दिव्य योग बनने से कई राशियों पर मां लक्ष्मी की अपार कृपा बरसेगी। वहीं वृषभ, मिथुन, मीन राशियों वाले व्यक्ति के व्यापार, पारिवारिक जीवन में सफलता, नौकरी, कारोबार, जमीन जायदाद, संपति और वाहन लाभ मिल सकता है। अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी और कुबेर जी पूजा करनी ज्यादा फलदायक रहेगी। पंडित विशिष्ट राधे शाम के अनुसार अक्षय तृतीया का मतलब है कभी खत्म न होने वाला इसलिए इस दिन भूलकर कर्ज और दवाइयां न ले। इसी दिन बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा का शुभारंभ होता है। अक्षय तृतीया के दिन ही त्रेता युग का शुभारंभ हुआ था। इस दिन दान, दक्षिणा, पूजा-अर्चना करना, जमीन खरीदना और हवन यज्ञ करना फलदायक होगा। जबकि दीवाली और धनतेरस की तरह मां लक्ष्मी की पूजा करने से कई जातकों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के द्वार खुल सकते हैं। पंडित रोहित कुमार के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन जहां मां लक्ष्मी कुबेर जी पूजा होगी। वहीं इसी दिन तुलसी पूजन का भी विशेष स्थान मौजूद है। अक्षय तृतीया के दिन तुलसी पूजन करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं और तुलसी मां की कृपा भी बनी रहती है। तुलसी के पौधे के सामने हाथ जोड़कर खड़े होकर मन में अपनी मनोकामनाओं को दोहराते हुए पूजा करने का संकल्प लें। तुलसी के पौधे की जड़ में थोड़ा गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें। तुलसी के पौधे को फूल, पत्ते पर रोली से टीका लगाएं और थोड़े से चावल चढ़ाएं। इसमें गन्ने के रस डालने से परिवार में सुख शांति और हरेक मनोकामना पूर्ण होती है। माता तुलसी की उल्टी दिशा में सात बार परिक्रमा करके मन में भगवान विष्णु और तुलसी माता के मंत्रों का जाप करें। इससे जातक को जीवन में लाभ मिलेगा।

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