एमडी ड्रग्स और उसकी तस्करी के मामले में मप्र की राजधानी भोपाल, मंदसौर और नीमच संवेदनशील हैं। अब मप्र का गृह विभाग अगले तीन साल में इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी में जुटा है। एक दिन पहले बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्रालय के सचिव ने इसी को लेकर राज्यों के अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी और संवेदनशील जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की। मप्र से अपर मुख्य सचिव गृह शिवशेखर शुक्ला, डीजीपी कैलाश मकवाना और भोपाल के पुलिस कमिश्नर (सीपी) हरिनारायण चारी शामिल हुए। कांफ्रेंसिंग में भोपाल पुलिस कमिश्नर ने कहा- वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफार्म पर एमडी ड्रग्स में लगने वाले कैमिकल मौजूद हैं। बनाने की विधि है। केंद्र सरकार को चाहिए कि इन पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रयास हों। कानून बने। गृह विभग के एसीएस शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि मप्र अपनी तैयारी कर रहा है। तीन साल में इस ड्रग्स के धंधे को मप्र से खत्म करना है। इसी को ध्यान में रखकर काम करेंगे। हर 10 में से 6 ड्रग तस्करों को सजा नहीं मिल पाती, अब बिना ट्रायल हिरासत में रख सकेंगे मध्यप्रदेश में ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदलने की तैयारी है। वजह- ड्रग तस्करी के हर 10 मामलों में से 6 सजा तक नहीं पहुंच पाते। पुलिस तस्करों को पकड़ती है, केस दर्ज होते हैं, पर कोर्ट में जाते-जाते मामला कमजोर पड़ जाता है। इसी कारण अब सरकार और पुलिस गिरफ्तारी से आगे बढ़कर रोकथाम पर फोकस कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में सजा का प्रतिशत सिर्फ 43.86% है। यानी 56% से ज्यादा मामलों में या तो आरोपी छूट जाते हैं या केस सालों तक लंबित रहते हैं। नतीजा यह होता है कि बड़े ड्रग तस्कर जमानत पर बाहर आकर दोबारा नेटवर्क खड़ा कर लेते हैं। अब पुलिस प्रीवेंशन ऑफ इल्लीगल ट्रैफिक (पीआईटी) एक्ट की धारा-3 के व्यापक इस्तेमाल पर फोकस कर रही है। इसके तहत ड्रग तस्करी में शामिल या इसकी आशंका वाले व्यक्ति को बिना ट्रायल प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया जा सकता है। यह सजा नहीं, बल्कि भविष्य में अपराध रोकने की कार्रवाई मानी जाती है। इसमें आरोपी को अधिकतम एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह रणनीति 9 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक के बाद तेज हुई। इसमें सभी राज्यों को 3 साल में ड्रग तस्करी और उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने का निर्देश दिया गया था। 6 बिंदुओं में तैयार किया गया एंटी-ड्रग प्लान : ड्रग नेटवर्क से निपटने के लिए राज्य ने छह स्तरों पर एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें तस्करी के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के साथ-साथ जांच और कार्रवाई की कमजोर कड़ियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। NDPS कुल केस का हाल सजा क्यों नहीं हो पाती? जांच से कोर्ट तक पूरी प्रक्रिया में कमी अदालतें हर केस में देख रही हैं धारा-50 का पालन:अदालतें ड्रग मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धारा-50 के पालन को गंभीरता से देख रही हैं। कई केस इसलिए कमजोर पड़ जाते हैं, क्योंकि तलाशी से पहले आरोपी को उसके अधिकार नहीं बताए जाते।


