अग्निवीर भर्ती में पास होने के बाद एक कैंडिडेट जॉइनिंग के लिए आर्मी ऑफिस पहुंचा। उसके डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होना थे। इस दौरान आर्मी अफसर को शक हुआ। उन्हें लगा नौकरी पाने के लिए उसने नकली डॉक्यूमेंट लगाए हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को लेटर लिखा और डॉक्यूमेंट जांच करने के लिए कहा। पुलिस ने मामले में जांच की और रिपोर्ट सौंपी। जिसमें डॉक्यूमेंट सही पाए गए। फिर भी आर्मी ने युवक को बहाली नहीं दी। अब उसने कोर्ट से गुहार लगाई है। उसका कहना है कि अपनी लड़ाई कोर्ट में लड़ूंगा। क्या है पूरा मामला, पढ़िए ये रिपोर्ट- सबसे पहले जानिए कि पेंच कहां से शुरू हुआ
इंदौर की विजयनगर कॉलोनी में रहने वाले 22 साल के अजय यादव अग्निवीर भर्ती परीक्षा में शामिल हुए। 6 जनवरी 2024 को इंदौर स्थित देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स ग्राउंड पर फिजिकल टेस्ट था। आखिर में एग्जाम का रिजल्ट घोषित हुआ, जिसमें अजय पास हो गए। परिवार में सब खुश थे। अब अजय को जॉइन करना था। जॉइनिंग के लिए वो महू स्थित आर्मी ऑफिस पहुंचे। यहां उनके डॉक्यूमेंट की जांच की गई। इस दौरान अफसरों ने उनके डॉक्यूमेंट फर्जी होने की शंका जताई और जॉइनिंग नहीं दी। यहां से मामले में जांच शुरू हुई। कर्नल ने पुलिस को लेटर लिख जांच के लिए कहा
कैंडिडेट अजय यादव के डॉक्यूमेंट के फर्जी होने की आशंका के बाद डायरेक्टर रिक्रूटिंग कर्नल एआरओ महू ने एक लेटर इंदौर पुलिस के जोन 3 अधिकारी को लिखा। लेटर 23 मार्च 2024 को लिखा गया, जिसमें कर्नल ने लिखा कि आधार कार्ड नंबर 2660######## नाम के अजय यादव निवासी इंदौर ने सेना भर्ती रैली 2023-24 के लिए आवेदन किया था। उनके डॉक्यूमेंट की जांच के बाद सामने आया है कि उन्होंने 2019, 2022 और 2023 की रैली अटेंड की है। 2019 की रैली में उन्होंने अपनी डेट ऑफ बर्थ 9 दिसंबर 1996 बताई है, जबकि 2022 और 2023 की रैली में डेट ऑफ बर्थ 9 दिसंबर 2002 बताई है। 2019 की रैली में आधार कार्ड का नंबर 9865###### है और 2022 और 2023 की रैली में आधार कार्ड का नंबर 4548###### है। यानी आधार कार्ड के नंबर में अंतर है। रैली के डॉक्यूमेंट में मोबाइल नंबर भी अलग-अलग पाए गए हैं। लेटर के आखिर में कर्नल की तरफ से एक टीप लिखी गई, जिसमें पुलिस अधिकारियों से कहा गया कि ऐसा लगता है कि कैंडिडेट अजय यादव ने भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए अपने दस्तावेज नकली बनाए हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। ये लेटर 4 अप्रैल 2024 को ग्रामीण एसपी को भी कर्नल द्वारा भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। कैंडिडेट को आरटीआई में दिया ये जवाब
इधर, अजय को पता नहीं चल रहा था कि उन्हें भर्ती क्यों नहीं लिया जा रहा है। अधिकारियों ने दस्तावेज नकली होने की शंका जाहिर कर उन्हें आउट कर दिया था। जांच कब तक चलेगी। कौन से दस्तावेज नकली है। ये भी उन्हें अधिकृत तौर पर पता नहीं था। अजय ने आरटीआई लगाकर सेना के अधिकारियों से जानकारी मांगी। जून में उन्होंने आरटीआई लगाई थी और जुलाई में अधिकारियों ने जवाब दिया, जिसमें बताया कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान ये पाया गया कि 2019 में सोल्जर टीडीएन और 2023 में एवीजीडी में अलग-अलग जन्म तारीख के साथ दो भर्ती रैलियों में हिस्सा लिया। फर्जी दस्तावेज तैयार कर भर्ती प्रक्रिया को गुमराह किया। इसलिए आपको अस्वीकार कर दिया गया है। 3 पॉइंट में समझिए जांच रिपोर्ट में क्या निकला
कर्नल की तरफ से पुलिस अधिकारियों को भेजे गए लेटर के जवाब में जांच पूरी कर रिपोर्ट भेजी गई। महू थाना प्रभारी से मामले की जांच करवाई गई। पढ़िए जांच में क्या पाया गया- 1. मोबाइल से किया आवेदन – अग्निवीर योजना सेना भर्ती के उम्मीदवार अजय यादव ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन से अग्निवीर योजना में आर्मी भर्ती के लिए आवेदन किया था। साल 2022 में एमपी ऑनलाइन से इंडियन आर्मी के पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। जिसमें आधार कार्ड के अंकों में गलती हो गई थी। 2023 की अग्निवीर योजना में अग्निवीर जीडी के पद पर चयन हुआ है। जिसमें फर्जी डॉक्यूमेंट की बात कही गई। 2. 2019 की रैली अटेंड ही नहीं की – अजय ने बताया कि वेरिफिकेशन के दौरान महू आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस के सॉफ्टवेयर में मेरे नाम से पूर्व में अतिरिक्त जानकारी होने के कारण सेना भर्ती कार्यालय महू इंदौर से पत्र के माध्यम से वेरिफिकेशन पत्र जारी हुआ, जिसमें पता चला कि मेरे नाम से साल 2019, 2022 और 2023 में रैली अटेंड करना बताया है। जबकि मैंने साल 2019 में कोई रैली अटेंड ही नहीं की है। केवल एप्लीकेशन फॉर्म आर्मी ट्रेडमैन के लिए भरा था। मैंने 2022 और 2023 में केवल भर्ती के लिए फॉर्म भरने के लिए एमपी ऑनलाइन पर डॉक्यूमेंट दिए थे, जहां जानकारी गलत भरे जाने की संभावना है। 3. मोबाइल नंबर किसी और का निकला – जांच रिपोर्ट में पुलिस ने बताया कि शिकायत आवेदन में मोबाइल नंबर 62660##### अजय का बताया गया है। इस नंबर की सिम राहुल पिता जमनालाल सैरिया उम्र 18 साल निवासी ग्राम बैरखेड़ी थाना झागर जिला गुना के नाम से है। कैंडिडेट अजय यादव और राहुल सैरिया का आपस में कोई संबंध नहीं है। न ही दोनों दोस्त हैं। इसका खुलासा खुद राहुल ने फोन पर बातचीत के दौरान किया। ऐसे हुआ दोनों महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन डेट ऑफ बर्थ सही निकली – कैंडिडेट अजय पर अपनी डेट ऑफ बर्थ गलत बताने के आरोप लगे। पुलिस ने जांच रिपोर्ट में खुलासा किया कि अजय के डॉक्यूमेंट की कॉपी आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस महू से प्राप्त की गई, जिसमें 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, एनसीसी सर्टिफिकेट, जाति प्रमाण पत्र, कक्षा 1 से 4 तक की मार्कशीट शामिल है। सभी पर अजय यादव का ही नाम है। सभी डॉक्यूमेंट पर उसकी डेट ऑफ बर्थ 9 दिसंबर 2002 लिखी हुई है। ये स्पष्ट है कि यही सही डेट ऑफ बर्थ है। इसमें किसी प्रकार की कोई कांट-छांट नहीं की गई है। आधार कार्ड भी सही निकला
डॉक्टूमेंट वेरिफिकेशन के लिए जिस आधार कार्ड को जमा किया था, वह नकली नहीं है। कैंडिडेट द्वारा 14 नंबर वाला आधार कार्ड दस्तावेज वेरिफिकेशन के लिए आर्मी सिक्रूटिंग ऑफिस महू में जमा नहीं कराया गया। आर्मी ऑफिस महू से लेटर में जिस 14 नंबर के आधार कार्ड का जिक्र है, जिसे अजय यादव का बताया गया है, वो उपलब्ध नहीं कराया गया है। दिनभर काम, शाम को पढ़ाई कर तैयारी की
अजय ने बताया कि अग्निवीर योजना में सिलेक्शन के बाद मैं जॉइनिंग के लिए महू रिक्रूटिंग आर्मी ऑफिस पहुंचा था। वहां उन्होंने मेरे डॉक्यूमेंट पर शंका जताई। इसके बाद जांच करवाई। जांच में सभी डॉक्यूमेंट सही पाए गए। मैं दोबारा जॉइनिंग के लिए गया तो वहां के कर्नल ने कहा कि आपको बाहर कर दिया है। गोलमोल जवाब इसलिए हाई कोर्ट में याचिका
हाईकोर्ट एडवोकेट अमन मालवीय का कहना है कि सारी बातें इंवेस्टिगेशन में साफ हो चुकी हैं। इसके बाद भी याचिकाकर्ता अजय यादव को जॉइनिंग नहीं दी गई है। उसे गोलमोल जवाब दिया गया है। परेशान होकर उसने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका लगा न्याय की गुहार लगाई है। लिखित में कोई कारण नहीं बताया है कि क्यों जॉइनिंग नहीं दी है। रिक्रूटिंग ऑफिसर ने सारी जांच करवाई है। भास्कर ने महू हेडक्वार्टर और जबलपुर किया संपर्क
महू के मिलिट्री हेडक्वार्टर के एडम कमांडेंट से भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया कि इस बारे में जबलपुर हेडक्वार्टर से ही रिक्रूटमेंट को लेकर ज्यादा जानकारी मिल सकती है। हमारे यहां से इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती है। इस केस में जॉइनिंग को लेकर और कोई जांच लंबित है या मौजूदा स्टेटस क्या है ये भी जबलपुर से ही पता चल सकेगा। हमने जबलपुर हेडक्वार्टर से भी संपर्क का प्रयास किया, लेकिन जवाब नहीं मिला।


