अजमेर दरगाह दीवान के बेटे ने वक्फ-कानून का किया समर्थन:बोले- इससे नुकसान नहीं फायदा; सरवर चिश्ती बोले-जो मुसलमान फेवर में, वो पे-रोल पर हैं

वक्फ संशोधन कानून 8 अप्रैल से देशभर में लागू हो गया है। विपक्षी पार्टियों के साथ ही देशभर में मुस्लिम इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसके समर्थन में भी हैं। अजमेर दरगाह दीवान के बेटे ने वक्फ कानून का समर्थन करते हुए इसे सही बताया है। उन्होंने कहा- आज की तारीख में वक्फ के ऊपर लैंड माफिया का कब्जा है और बड़े रसूखदार लोगों ने कौड़ियों के दाम में वक्फ की प्रॉपर्टी किराए पर ले रखी है। यह कानून इसे मुक्त करने के लिए लाया गया है। उधर, अजमेर दरगाह से जुड़ी खादिम संस्था अंजुमन सैयद जादगान ने वक्फ कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा- यह सांप्रदायिक एजेंडा है। 99.9% मुसलमान नए वक्फ कानून के खिलाफ है। सिर्फ 0.1% इसके फेवर में है। दरगाह दीवान के बेटे ने किया वक्फ कानून का समर्थन
उधर, दरगाह दीवान के बेटे नसरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- वक्फ बोर्ड में जो सालों से भ्रष्टाचार फैला हुआ था, इस कानून के जरिए उसे मुक्त करवाया जाएगा। मैं देश के मुसलमान को यही कहूंगा कि इस कानून से घबराने की जरूरत नहीं है। इससे कोई प्रॉपर्टी सीज नहीं होगी, बल्कि वक्फ से जुड़ी प्रॉपर्टी का सही तरीके से इस्तेमाल होगा। नसरुद्दीन चिश्ती बोले- वक्फ पर लैंड माफिया का कब्जा
नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा था कि वक्फ की पवित्रता को बनाए रखने के लिए कानून लाया गया है। वक्फ की पवित्रता कहीं न कहीं भंग हो गई थी। इसे वापस से कायम करने के लिए सरकार कानून लेकर आई है। देश के मुसलमान को समझने की जरूरत है कि इस एक्ट से नुकसान नहीं फायदा है। यह आम मुसलमान से जुड़ा हुआ मामला नहीं है। सरवर चिश्ती बोले- मस्जिद-दरगाह के नीचे मंदिर तलाश रहे
खादिम संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा- पिछले 11 सालों से मुसलमान को सांस तक नहीं लेने दी जा रही है। लव जिहाद, आर्टिकल 370, ट्रिपल तलाक और कभी मस्जिद और दरगाह के नीचे मंदिर तलाश किया जा रहा है। अजमेर दरगाह में भी मंदिर की तलाश की जा रही है और सरकार खामोश है। उन्होंने कहा- मुस्लिम इलाकों में मुखबिर और दलालों की कोई कमी नहीं है, जो कि नए वक्फ कानून की हिमायत कर रहे हैं। ‘कोर्ट में लड़ाई चलती रहेगी, हमारी जगह पर बुलडोज करते रहेंगे’
सरवर चिश्ती ने कहा- सुप्रीम कोर्ट को इस पर टेंपरेरी स्टे देना चाहिए, वरना कोर्ट में लड़ाई चलती रहेगी और यह हमारी जगह को बुलडोज करते रहेंगे। इसमें मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशंस और दरगाह के साथ ही खानूकाओं के मुसलमानों को आगे बढ़कर आना चाहिए। न कि उन दलालों को जो कि हुकूमत की चापलूसी करते रहे अपने छोटे-छोटे इंटरेस्ट के लिए। उन्होंने कहा- वक्फ के मामले में सभी मुसलमान एक प्लेटफॉर्म पर है। 1935 में भी काजरी बिल के नाम से वक्फ आया था। तब भी अंजुमन ने इसको रिजेक्ट किया था। 2002 में भी इसको रिजेक्ट किया था। आज हम वापस इसका विरोध करते हैं। चिश्ती ने कहा- अब शेरवानी उतारकर रोड पर आने का वक्त आ गया है। फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड करेगी। पढ़िए सरवर चिश्ती से जुड़ी अन्य खबरें… ‘मुसलमानों को गालियां बकी जाएंगी तो फूल नहीं बरसेंगे’:अजमेर के सरवर चिश्ती बोले- लॉरेंस बिश्नोई नामचीन मुसलमानों को मारता है, ये इजरायली मैकेनिज्म अजमेर में अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने बहराइच (UP) में हुए उपद्रव, मुंबई में हुई बाबा सिद्दीकी (NCP अजित पवार गुट के नेता और महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री) की हत्या को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि मुसलमानों को गालियां बकी जाएंगी। उनके घर (बहराइच) पर चढ़कर हरा झंडा उतारकर भगवा झंडा लहराया जा रहा है। फिर फूल तो बरसेंगे नहीं, जो हुआ, वही होना था। (पढ़ें पूरी खबर)

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *