जेएलएन अस्पताल के न्यू पीडियाट्रिक ब्लॉक के पीआईसीयू में भर्ती 8 साल की एक बालिका को एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगा दिया गया। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद परिजन व नर्सिंग कर्मी को मामले की जानकारी लगी।सूचना पर डॉक्टर तुरंत पीआईसीयू पहुंचे और रातभर बालिका के स्वास्थ्य पर नजर रखी। मरीज को एक्सपायरी डेट का को जो इंजेक्शन लगाया गया। यह मलेरिया के मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाला आरटीसूनेट इंजेक्शन था। फिलहाल पेशेंट की हालत ठीक है। स्टाफ की लापरवाही आई सामने इस मामले में नर्सिंग ऑफिसर राकेश मीना और फार्मासिस्ट कैलाश विश्नोई की लापरवाही सामने आई है। परिजनों ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविन्द खरे को शिकायत की। इसके बाद राकेश मीना को पीआईसीयू से हटाकर 17 सीसी नोटिस जारी किया गया, जबकि कैलाश विश्नोई को निलंबित कर दिया गया है। दवा काउंटर प्रभारी राजेश घटियाली के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस मामले को लेकर 6 सदस्यीय दो जांच कमेटियों का गठन किया है। कमेटियों में डॉ. जेपी नारायण, डॉ. दीपक गर्ग, डॉ. भागचंद, नर्सिंग अधीक्षक भगवान मीना, फार्मासिस्ट नरेन्द्र वर्मा, पीआईसीयू प्रभारी मंजू सैन को शामिल किया है। एनीमिया की पेशेंट को मलेरिया का इंजेक्शन लगाया डॉ. खरे ने बताया कि बालिका को एनीमिया और इन्फेक्शन के कारण भर्ती किया गया था। उसे मलेरिया के मरीजों के लगने वाला आरटीसूनेट इंजेक्शन लगाया गया। वार्ड में सप्लाई नहीं होने के कारण कैजुअल्टी के दवा काउंटर से इंजेक्शन मंगवाया। ड्यूटी पर मौजूद फार्मासिस्ट कैलाश विश्नोई ने बिना जांच पड़ताल के पुराना अवधि पार इंजेक्शन मरीज के परिजन को थमा दिया। वार्ड में नर्सिंग ऑफिसर राकेश मीना ने भी इंजेक्शन की जांच नहीं की और बालिका के लगा दिया। परिजन की नजर इंजेक्शन पर पड़ी तो मामला सामने आया। डॉ. खरे ने बताया कि कैजुअल्टी काउंटर से लाए गए इंजेक्शन की जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह गलती हुई। उन्होंने कहा कि दवा काउंटर पर एक्सपायरी दवाएं रखने की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में निदेशालय को भी शिकायत भेजी जाएगी। फार्मासिस्ट ने काउंटर से क्यों नहीं हटाया इंजेक्शन अधीक्षक डॉ. खरे ने इस मामले में फार्मासिस्ट की भी गलती मानी है कि जब किसी दवा की एक्सपायरी डेट निकल गई तो काउंटर पर दवा का स्टॉक क्यों रखा हुआ है। दवा वितरण के लिए पूरी टीम लगी हुई है। ऐसे में उनका काम दवाओं की मॉनिटरिंग का है। इस कारण उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। डॉ. खरे ने बताया कि मरीज के उपचार में लापरवाही कभी बर्दाश्त नहीं होगी। नर्सिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी है कि वह पहले दवा लगाने से पहले उसकी जांच करे। नर्सिंग राकेश मीना को 17 सीसी का नोटिस दिया जा रहा है। उसकी 2025 की भर्ती में नियुक्ति हुई है। इस मामले में निदेशालय को भी शिकायत भेजी जाएगी।


