रांची पड़हा राजा सनिचराय सांगा ने कहा कि हमारा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था मानव की उत्पति के साथ हुआ है। यही वजह है कि ब्रिटिश हुकूमत और भारत सरकार ने भी हमारे लिए अलग व्यवस्था रखी। लेकिन अब हमारे ऊपर पंचायत व्यवस्था थोपने की कोशिश की जा रही है। हमें पेसा कानून 1996 के 23 प्रावधान चाहिए, जेपीआरए 2001 नहीं। सांगा, सोमवार को आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद द्वारा एसडीसी, रांची में आयोजित पेसा महासम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से ही हम आदिवासियों का अस्तित्व बचेगा। सम्मेलन में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें कहा गया कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 और नगरपालिका अधिनियम 2011 को झारखंड से निरस्त किया जाए। आदिवासियों के पुरखों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के ऊपर पंचायत राज व्यवस्था को न थोपा जाये। पेसा कानून 1996 के 23 प्रावधानों के अनुरूप पेसा नियमावली बनाकर झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू किया जाए। सम्मेलन में ग्राम प्रधान संघ के संयोजक रामकिशोर उरांव ने कहा कि हमारे लिए संविधान में अलग व्यवस्था की गई है। इसलिए हमें जेपीआरए 2001 नहीं, बल्कि पेसा कानून 1996 ही चाहिए। आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद की महासचिव सुषमा बिरुली ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कहा कि यह हमारी जमीन, इलाका और प्राकृतिक संसाधन है। फिर बाहरी लोग कैसे यहां सबकुछ हड़प रहे हैं। आदिवासी थिंकटैंक के संयोजक वाल्टर भेंगरा ने कहा कि जेपीआरए 2001 को ही पेसा नियमावली के द्वारा थोपने की कोशिश की जा रही है। सम्मेलन को लक्ष्मी नारायण मुंडा, ज्योति भेंगरा, मरकूस मुंडा, मसीह चरण पूर्ति, जोन जुनस तिडू़ एवं किस्टो कुजूर ने भी संबोधित किया। इस सम्मेलन का संचालन मेरी क्लॉडिया सोरेंग एवं धन्यवाद ज्ञापन बिनसाय मुंडा ने किया। आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद के पेसा महासम्मेलन में मंच पर मौजूद सनिचराय सांगा, ग्लैडशन डुंगडुंग, सुषमा बिरुली व अन्य । जिला परिषद सदस्य अजय एक्का ने कहा कि पंचायत राज कानून आदिवासियों के अनुरूप नहीं है। इसलिए, पेसा कानून 1996 बनाया गया। आज जेपीआरए 2001 को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करते हुए हमारी हकमारी की जा रही है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई का एनजीओ यहां आकर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। आदिवासियों के विकास एवं कल्याण के लिए आवंटित राशि का पूरा लाभ बाहरी लोग ले रहे हैं। इसलिए, झारखंड में पेसा कानून तुरंत लागू किया जाना चाहिए। आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था हमारे पूर्वजों की है और पंचायत राज व्यवस्था गांधी जी की देन है। हमारे पूर्वजों ने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के आधार पर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। फलस्वरूप, इसे संवैधानिक मान्यता दी गई। इसी आधार पर पांचवीं अनुसूची बनी और पेसा कानून 1996 बनाया गया। इसे लागू करने के बजाय झारखंड सरकार हमारे ऊपर पंचायत व्यवस्था थोप रही है।


