अटल प्रोग्रेस-वे से चंबल विकास को मिलेगी तेजी:मुख्यमंत्री ने अटल प्रोग्रेस-वे और कृषि वर्ष-2026 की समीक्षा की

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना के कामकाज की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना चंबल क्षेत्र के समग्र विकास को तेज करेगी। बैठक में अटल प्रोग्रेस-वे के दो प्रस्तावित प्लान का प्रेजेेंटेशन दिया गया। मुख्यमंत्री ने मार्ग को व्यापक पर्यटन दृष्टि से देखने को कहा और निर्देश दिए कि पेंच नेशनल पार्क, कान्हा तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना नेशनल पार्क को जोड़ने वाले हिस्से को ‘टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि 625 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप वाइल्डलाइफ टूरिज्म को बढ़ावा देगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से मुरैना, श्योपुर और भिंड के जिले राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय एक्सप्रेस-वे से जुड़ेंगे और राजस्थान से निकलने वाले दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेस-वे व उत्तर प्रदेश के आगरा–लखनऊ हाईवे से सीधा कनेक्शन बन जाएगा। सीएम ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से कोटा, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, आगरा और दिल्ली के साथ जुड़ाव मजबूत होगा और यात्रा समय में कमी आएगी। अध्ययन के लिए ब्राजील , इजराइल जाएंगे किसान साल 2025 में मनाए गए उद्योग वर्ष के बाद अब 2026 कृषि को समर्पित होगा। इसकी शुरुआत जनवरी में नर्मदापुरम में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि वर्ष-2026 की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे साल का फोकस किसानों की आय बढ़ाने व कृषि आधारित रोजगार सृजन पर रहेगा। साल भर के आयोजनों का कैलेंडर भी जारी हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि वर्ष-2026 के तहत शुरू होने वाली सभी गतिविधियां तीन साल के स्पष्ट लक्ष्य के साथ संचालित होंगी। इसमें कृषि यंत्रीकरण, किसानों के लिए प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी विस्तार और एफपीओ के गठन को प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल तकनीक को बढ़ाया जाएगा। किसानों को उन्नत कृषि राज्यों के साथ-साथ इजराइल व ब्राजील जैसे देशों की अध्ययन यात्राएं कराई जाएंगी। भोपाल के गुलाब महोत्सव को पुष्प महोत्सव के रूप में विस्तारित कर सभी जिलों में फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। पूरे वर्ष प्रदेशभर में किसान सम्मेलन, कृषि मेले और फसल आधारित महोत्सव आयोजित होंगे।

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