25 दिसंबर को देश के गृहमंत्री अमित शाह के रीवा आगमन से पहले अटल पार्क में प्रतिमा अनावरण को लेकर तैयारियां भी तेज हैं, लेकिन इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर महापौर अजय मिश्रा बाबा ने अड़ंगा लगा दिया है। एक ओर सरकार समय पर अनावरण की बात कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस महापौर की तरफ से प्लास्टिक प्रतिमा लगाए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 25 दिसंबर को देश के गृहमंत्री अमित शाह के रीवा आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार शाम अटल पार्क के निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा समय पर स्थापित की जाएगी और 25 दिसंबर को इसका अनावरण गृहमंत्री अमित शाह स्वयं करेंगे। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आगे कहा गृहमंत्री के रीवा आगमन पर विभिन्न विकास योजनाओं की घोषणा की जाएगी। बसामन मामा में आयोजित किसान महासम्मेलन में किसानों को बड़ी सौगात दी जाएगी और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा, बसामन मामा क्षेत्र में 10 हजार से अधिक गोवंश से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि गृहमंत्री अमित शाह के रीवा आगमन पर कई योजनाओं को हरी झंडी मिलने की संभावना है। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी की प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर महापौर अजय मिश्रा बाबा ने नाराजगी जाहिर की है। अटल पार्क निरीक्षण के बाद महापौर ने कहा, धातु की प्रतिमा समय पर तैयार नहीं हो पाई है और उसके स्थान पर प्लास्टिक की प्रतिमा लगाए जाने की बात सामने आई है, जो जनता के पैसे का दुरुपयोग है। जबकि मूर्ति के लिए नगर निगम ने प्रस्ताव पारित कर एडवांस पहले ही दे दिया था। महापौर अजय मिश्रा बाबा ने कहा, अटल बिहारी वाजपेयी सर्वदलीय सम्मान के प्रतीक थे। उनकी धातु प्रतिमा का अनावरण किसी भी समय किया जा सकता है, फिर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। हम प्लास्टिक की मूर्ति का अनावरण नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे कहा, इस विषय में मूर्तिकार से चर्चा की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। महापौर ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर प्रतिभा पाल से चर्चा की गई है। मैं अब पत्राचार भी कर रहा हूं। फिलहाल प्लास्टिक प्रतिमा से अनावरण को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।


