अधिकमास का असर…:2025 की तुलना में 2026 में शुरू के 6 माह त्योहार 10 दिन पहले, इसके बाद 18 दिन तक की देरी से

यूं तो हर साल त्योहारों की तिथियों में बदलाव होता है, लेकिन वर्ष 2026 हिंदी पंचांग के महीनों के हिसाब से अधिकमास वाला साल होगा और इस साल में दो ज्येष्ठ माह होने से यह साल 12 की बजाए 13 महीने का होगा। इस कारण शुरू के 6 माह में वर्ष 2025 की तुलना में अधिकांश त्योहार 10 दिन पहले और बाद के 6 माह में होने वाले त्योहार 16 से 18 दिन तक की देरी से आएंगे। मिसाल के तौर पर 2025 में होली 14 मार्च को थी, लेकिन 2026 में यह 4 मार्च को होगी। इसी तरह 2025 में दीपावली 20 अक्टूबर के थी, अब अगले वर्ष 8 नवंबर को यानी 17 दिन की देरी से आएगी। बता दें कि त्योहारों की तिथियों को देखने के बाद ही परीक्षाओं के टाइम-टेबल तैयार होते हैं और व्यापारी भी समय से पहले माल मंगाने की व्यवस्था करते हैं। पं. विष्णु राजौरिया के अनुसार हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति व उसकी गति पर आधारित होते हैं, और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष के 365 दिन होते हैं। इस अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में अधिकमास होता है, जिस कारण पर्वों की तिथियों में पिछले सालों की तुलना में काफी दिनों का अंतर आ जाता है। इस अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। मकर संक्रांति में ज्यादा बदलाव नहीं… ज्योतिषी स्मिता पंडित के अनुसार अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून को समाप्त होगा। मकर संक्रांति सूर्य (सौर वर्ष) पर आधारित पर्व है इसलिए यह ज्यादातर 14 जनवरी तो किसी साल 15 जनवरी को होती है।

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