अधिकमास जुड़ने से 2026 में ज्येष्ठ माह की अवधि का समय 58 से 59 दिनों तक रहेगा

भास्कर न्यूज | अमृतसर अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से एक जनवरी को नए साल की शुरुआत हो जाती है। वहीं हिंदू परंपरा में समय की गणना विक्रम संवत के आधार पर की जाती है। पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा नए विक्रमी संवत प्रारंभ होता है, फाल्गुन मास वर्ष का अंतिम महीना माना जाता है। इस दौरान विक्रम संवत का 2082 वर्ष चल रहा है। वहीं आने वाला साल 2026 विक्रम संवत 2083 पंचांग की दृष्टि से कई मायनों में अलग, महत्वपूर्ण रहने वाला है। अगले साल अधिकमास पड़ने वाला है जिसमें शादी-विवाह वर्जित होंगे। अधिकमास को आत्मचिंतन और साधना का समय माना जाता है। इसलिए विवाह, सगाई और गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य इस माह में नहीं होंगे। पंडित राम अवतार के अनुसार अधिकमास में भगवान विष्णु की विशेष उपासना मानी जाती है। इसलिए, धार्मिक कर्मों में ढिलाई, जल्दबाजी अनियमितता को गलत माना जाता है। अगले साल विक्रम संवत पंचांग 2083 दृष्टि से कई मायनों में अलग और महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस वर्ष अधिकमास के कारण ज्येष्ठ (जेठ) मास के रूप में आएगा। साल 2026 में एक की जगह दो-दो ज्येष्ठ महीने रहेंगे। जिसमें एक सामान्य ज्येष्ठ और एक अधिक ज्येष्ठ। अधिकमास जुड़ने से ज्येष्ठ का समय लगभग 58 से 59 दिनों तक रहेगा। वहीं अधिकमास को ही मलमास भी कहा जाता है और इसे विशेष धार्मिक कर्मों के लिए पवित्र माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो विक्रम संवत 2083 में 13 महीने होंगे।

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