किलोमीटर स्कीम का टेंडर रद्द करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर शुक्रवार को पंजाब रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी कान्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने अधिकतर जिलों में बसों का चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया, जब बीती रात कई जिलों में उनके नेताओं को घरों से हिरासत में ले लिया गया। इसके विरोध में पटियाला, संगरूर, कपूरथला समेत कई जगह सुबह ही बस अड्डों के गेट बंद कर दिए गए। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी हुई। पुलिस ने संगरूर, फरीदकोट और पटियाला में आंदोलन को हिंसक होने से बचा लिया। संगरूर में 35 सदस्यों को हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। पुलिस ने सदस्यों पर डाले गए पेट्रोल के असर को समाप्त करने के लिए पानी की बौछारें डालीं। इस बीच धक्का-मुक्की के दौरान धूरी के एसएचओ जसबीर सिंह आग की चपेट में आ गए, जिसे अन्य पुलिस कर्मचारियों ने बुझाया और उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया। बरनाला में माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कर्मचारी सुबह से ही बस स्टैंड पहुंच गए और दो मुख्य दरवाजों में से एक को बंद कर पक्का धरना शुरू कर दिया। लिहाजा, यहां दोपहर लगभग दो बजे माहौल शांत हुआ। कपूरथला में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तू-तू, मैं- मैं हो गई। इस बीच यूनियन के प्रदेश उपप्रधान गुरप्रीत सिंह पन्नू ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। क्यों किया चक्का जाम…यूनियन नेताओं का कहना है कि पंजाब सरकार रोडवेज को निजी ऑपरेटरों के हवाले करने की तैयारी में है। किलोमीटर स्कीम के तहत बसों का प्राइवेटाइजेशन किया जाना प्रस्तावित है। इससे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी। इस फैसले के विरोध में यूनियन ने शुक्रवार दोपहर 1 बजे प्रदर्शन का एलान किया था, लेकिन उससे पहले ही वीरवार देर रात यूनियन के कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। सरकार ने नहीं किया हमारी मांगों का कोई समाधान : यूनियन नेता यूनियन के बलजीत सिंह गिल व परमजीत सिंह कोहाड़ ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान करने की बजाय सरकार और पुलिस प्रशासन ने चल रहे शांतिपूर्ण संघर्ष में धक्काशाही की गई और पुलिस प्रशासन ने नेताओं और वर्करों को उनके घरों से हिरासत में ले लिया, कर्मचारियों की पगड़ियां उतारी गईं, उनके कपड़े फाड़े गए और यहां तक कि लाठीचार्ज भी किया गया। वित्त मंत्री चीमा बोले- ऐसा नहीं होता कि 24 घंटे में मामला हल हो जाए वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है। उन्हें कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। बैठकर सारे मामले हल होंगे। ऐसा नहीं होता कि 24 घंटे में मामला हल हो जाए। उन्हें संयम रखना चाहिए।


