जिला तरनतारन और देहाती थाना मजीठा में दर्ज 4 मामलों के बाद शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार सुखविंदर कौर की बेटी कंचनप्रीत कौर शुक्रवार को मजीठा थाने में बयान दर्ज कराने पहुंची। वहां थाने में साढ़े 6 घंटे पूछताछ के बाद तरनतारन पुलिस ने दर्ज अन्य मामले में कंचनप्रीत को गिरफ्तार कर लिया। तरनतारन उपचुनाव के 18 दिन बाद शुक्रवार को कंचनप्रीत कौर मजीठा थाने में बयान दर्ज कराने आई थीं। साथ में िशअद नेता विरसा सिंह वल्टोहा आए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें थाने के अंदर नहीं जाने दिया। थाने में कंचनप्रीत सिर्फ अपने वकील के साथ ही अंदर गईं। कंचनप्रीत सुबह 11:45 बजे थाने में गईं और पुलिस ने शाम 5:30 बजे तक पूछताछ की। कंचनप्रीत को तरनतारन पुलिस साथ ले गई, जिसे शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। गौर हो कि तरनतारन उपचुनाव के दिन 11 नवंबर को तरनतारन स्थित थाना झब्बाल में एक महिला वोटर को आप उम्मीदवार को वोट न डालने की धमकी देने का गैंगस्टर अमृतपाल बाठ और एक अज्ञात पर्चा दर्ज किया गया था। अज्ञात मामले में कंचनप्रीत का नाम जोड़ा गया है। वल्टोहा ने बताया कि कंचनप्रीत को गिरफ्तार न करने पर एसएसपी मनिंदर सिंह को 15 नवंबर को सस्पेंड किया गया, जो नाइंसाफी है। नेपाल के रास्ते विदेश भागने की चर्चा कंचनप्रीत की एसएसपी से हुई थी बहस तरनतारन उपचुनाव में एसएसपी से कंचनप्रीत की बहस हुई थी। पुलिस ने ड्यूटी में विघ्न डालने के आरोप में कंचनप्रीत आैर अन्य पर पर्चा दर्ज किया था। बाद में सोशल मीडिया पर कंचनप्रीत के नेपाल के रास्ते विदेश फरार होने की चर्चा हुई और गैंगस्टर अमृतपाल बाठ की प|ी बताया जा रहा था। कंचनप्रीत 18 दिन गायब रही थीं। पर्चे में कंचनप्रीत का नाम न होना सवालों के घेरे में जिस केस में कंचनप्रीत की गिरफ्तारी डाली गई, वह थाना झब्बाल में उपचुनाव के दिन 11 नवंबर को दर्ज हुआ था। इसमें विदेश में बैठे गैंगस्टर अमृतपाल सिंह बाठ आैर एक अन्य शामिल है। शिकायत में महिला गुरमीत कौर निवासी पधरी कलां ने बताया कि 10 नवंबर शाम 7:15 बजे घर पर काम कर रही थी कि बाहर से आवाज आई। वह बाहर निकली तो वहां एक लड़का था, जिसकी उम्र लगभग 20-25 साल होगी। चेहरा ढंका था। बाहर निकलते लड़के ने उसके कान के पास अपना फोन लगाया। फोन पर बात करने वाले ने कहा, ‘वह अकाली दल का वर्कर अमृतपाल बाठ बोल रहा हूं’, तुम्हें आप प्रत्याशी हरमीत सिंह को वोट नहीं डालनी है। अगर हरमीत सिंह चुनाव जीत गया तो देख लेना तुम्हारे साथ क्या होगा, तुम अपनी भलाई कर लो’। युवक ने फोन कान से हटाया और जाते-जाते धमकाया। अगर पर्चे में देखें तो कंचनप्रीत कौर का कहीं भी नाम नहीं है। पुलिस ने अमृतपाल बाठ को नामजद किया है और एक अज्ञात है। पर्चे में नाम न होने और शिकायतकर्ता महिला की आेर से दिए बयान में कंचनप्रीत का नाम न होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। पर्चे में कंचनप्रीत का नाम नहीं, बिना नोटिस गिरफ्तारी:वल्टोहा वल्टोहा ने आरोप लगाया कि सरकार ने कंचनप्रीत को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया है। पहली बार राजनीतिक प्रोपेगंडा के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं ताकि युवा नेता आगे न बढ़ें। कोर्ट ने कंचनप्रीत को तरनतारन में 3 और मजीठा में दर्ज 1 केस में गिरफ्तारी से राहत दी है और निर्देश दिया है कि नए मामले में गिरफ्तारी डालने से पहले 7 दिन का नोटिस दिया जाए। बिना नोटिस कंचनप्रीत की गिरफ्तारी डाली है।


