छत्तीसगढ़ में 2161 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में पहली बार 29 से ज्यादा आबकारी अधिकारियों को जांच एजेंसी ने आरोपी बनाया है। इन अधिकारियों ने शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। हर जिले के अधिकारी को प्रति शराब की पेटी 150 रुपए कमीशन मिलता था। इन पैसों को जमीन, मकान और कारोबार में निवेश किया है। ईओडब्ल्यू ने इन आबकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी कर ली है। जांच में इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितता के पर्याप्त सबूत मिले हैं। इसलिए सभी के खिलाफ 5 जुलाई को 5वीं चार्जशीट पेश की जाएगी। इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर विशेष अदालत एसीबी-ईओडब्ल्यू में सुबह 11 बजे पेश होने कहा गया है। नोटिस जारी होने के बाद से कई अधिकारी मोबाइल बंद कर गायब हो गए हैं। कुछ अधिकारियों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया है। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि बिना गिरफ्तारी के 29 से ज्यादा आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया जा रहा है। जांच एजेंसी इन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। अदालत में इनके खिलाफ मुकदमा चलेगा। आरोप सिद्ध होने पर अदालत के निर्देश पर ही गिरफ्तारी होगी। अगर पेशी में उपस्थित नहीं होंगे तो गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा। इसमें से 16 अधिकारी अभी नौकरी पर हैं, जबकि 12 अधिकारी रिटायर हो गए हैं। घोटाले में शामिल एक अधिकारी की बीमारी से मौत हो चुकी है। अवैध शराब की गाड़ियों की जानकारी देता था जनार्दन ईडी के परिवाद के अनुसार आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव सिंडिकेट के मुख्य सदस्य विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी का सबसे करीबी था। त्रिपाठी के निर्देश पर वह राज्य में आबकारी का सिस्टम चला रहा था। वह जिलों में ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर अन्य काम देखता था। जिले में पदस्थ अधिकारियों से समन्वय बनाने, उन्हें अवैध शराब की गाड़ियों की जानकारी देता था। साथ ही अधिकारियों को होने वाली समस्याओं का सामना करने की जिम्मेदारी थी। इसके अलावा विकास गोस्वामी, नीतू नोतानी, दिनकर वासनिक, अनिमेष तेनाम, विजय सेन शर्मा, इकबाल खान, नितिन खंडूजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर, मंजुश्री कसेर, सौरभ बख्शी, अशोक सिंह, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंह ठाकुर, सोनल नेताम, प्रमोद नेताम, मोहित जायसवाल, रविश तिवारी, रामकृष्ण मिश्रा समेत अन्य को आरोपी बनाने की चर्चा है। अधिकारियों का दावा है कि पिछले सरकार के तीन साल में जिले में पदस्थ आबकारी अधिकारियों को ही आरोपी बनाया गया है। सभी अधिकारी सीधे त्रिपाठी से जुड़े हुए थे। इन्होंने करोड़ों की प्रॉपर्टी खड़ी कर ली है। अधिकारियों की निगरानी में दुकानों में पहुंचती थी शराब
जांच एजेंसी का दावा है कि 2019 से 2023 तक शराब घोटाला है। इस दौरान जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों की निगरानी में डुप्लीकेट होलोग्राम लगा अवैध शराब डिस्टलरी से निकलकर सीधे दुकान जाता था। तत्कालीन सहायक आयुक्त जनार्दन कौरव की निगरानी में डुप्लीकेट होलोग्राम प्रिंट होकर अमित सिंह, दीपक दुआरी और प्रकाश शर्मा के माध्यम से तीनों डिस्टलरी में जाती थी। वहां होलोग्राम लगाकर अवैध शराब सीधे दुकान पहुंचता था। डुप्लीकेट होलोग्राम लगी शराब की बिक्री से अरुणपति त्रिपाठी 20 करोड़ रुपए का कमीशन मिला है। हर साल 70 करोड़ की वसूली करते थे जिले के अफसर
2019 से 2023 तक शराब सप्लायरों से जिला आबकारी अधिकारियों ने 319 करोड़ रुपए की वसूली है। यह पैसा सिंडिकेट को पहुंचाया गया। अप्रैल 2019 से जून 2022 तक अवैध शराब बेचकर 280 करोड़ रुपए वसूले गए। हर साल 70 करोड़ से ज्यादा की वसूली का टारगेट था। जिला आबकारी अधिकारियों ने इस दौरान 2174.60 करोड़ की 60 लाख पेटी अवैध शराब बेची।


