अधिसूचना जारी:1996 में भारत-पाक बॉर्डर के 4 जिलों के 22 थाना क्षेत्र प्रतिबंधित, अब तारबंदी फिर भी नियमों में शिथिलता नहीं

वर्ष 1996 में पाकिस्तान और भारत के पंजाब में हो रहे खालिस्तानी आंदोलन के चलते बाहरी लोगों के प्रवेश रोकने के लिए केंद्र ने प्रतिबंध लगाया था। उस समय बॉर्डर पर तारबंदी नहीं थी और इस इलाके से तस्करी और अन्य बाहरी लोगों के भारतीय सीमा में प्रवेश की आशंका थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने 12 मार्च 1996 को अधिसूचना जारी कर बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर व बीकानेर जिलों के 22 थाना क्षेत्रों की परिधि को प्रतिबंधित किया था। इन थाना क्षेत्रों की परिधि बॉर्डर तारबंदी से करीब 100 किमी. तक है। ऐसे में आज भी इन नियमों के अनुसार बॉर्डर इलाके में कलेक्टर या एसडीएम की अनुमति के बिना स्थानीय के अलावा बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता है। अब बॉर्डर पर तारबंदी भी है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन इलाकाें की करीब 20 लाख आबादी के लिए नियमों में शिथिलता के लिए पहल क्यों नहीं की? हाल ही में बॉर्डर पर रोहिड़ी में इस कानून की वजह से कार्यक्रम रद्द हुआ था। 1996 में अधिसूचना जारी, 4 जिलों के 20 लाख आबादी प्रभावित 12 मार्च 1996 को केंद्र सरकार ने दंड विधि संशोधन अधिनियम 1961 की धारा 3(1) के तहत बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर व बीकानेर जिलों में बॉर्डर से करीब 100 किमी. परिधि क्षेत्र में आने वाले 22 थाना इलाकों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया था। यहां बाहरी से मतलब स्थानीय रहवासी लोगों के अलावा जिले का भी व्यक्ति क्यों न हो, वो भी बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकता है। सिर्फ सरकारी कर्मचारी, विधानसभा या लोकसभा से निर्वाचित सदस्य को कानून में छूट दी गई है। छूट में उन लोगों को भी शामिल किया गया है, सरकारी लोक सेवक या उससे खून का संबंध रखने वाले उसके माता-पिता, पत्नी या पति हो। सम भी है प्रतिबंधित, हाइवे के दोनों तरफ 500 मीटर तक छूट जैसलमेर का पर्यटन क्षेत्र सम भी प्रतिबंधित एरिया है, लेकिन यहां वर्ष 2012 में कानून में छूट देते हुए सम जाने वाले हाइवे के 500 मीटर दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर किया था। हाइवे से 500 मीटर से बाहर की परिधि में बने रिसोर्ट और अन्य होटलों में बाहरी व्यक्तियों के ठहरने पर प्रतिबंधित है। हालांकि सम का डेजर्ट नियमों के अनुसार प्रतिबंधित है। बॉर्डर पर बने भारत माला हाइवे से भी बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। बदलाव: कलेक्टर – MLA प्रस्ताव गृह विभाग को भेजें कानून में शिथिलता या संशोधन के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टर बीएसएफ, आर्मी, पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां, जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाएं। जिला कलेक्टर की ओर से प्रस्ताव बनाकर राजस्थान सरकार के गृह विभाग को भेजा जाए। इसके बाद गृह विभाग की ओर से केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके बाद इस कानून में बदलाव संभव है। ताकि बॉर्डर के गांवों में आर्थिक और सामाजिक विकास हो सके। “वर्तमान ​परि​स्थितियों के हिसाब से बॉर्डर सिक्यूरिटी को लेकर प्रतिबंधित इलाके का रिव्यू किया ही जाना चाहिए। इसके लिए गृह विभाग को पत्र लिखा जाएगा। ताकि आर्थिक और सामाजिक विकास हो और बॉर्डर टूरिज्म को भी बढ़ावा मिले।” -उम्मेदाराम बेनीवाल, सांसद, बाड़मेर

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