रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसे गांवों के विस्थापन की सरकारी प्रक्रिया कागजों में तो पूरी हो चुकी, लेकिन जमीनी हकीकत में आज भी ग्रामीण जंगल में फंसे हुए हैं। हालात यह हैं कि वर्ष 2022 में गुलखेड़ी गांव से विस्थापन की शुरुआत होने के बावजूद 4 साल बाद भी 18 से 20 परिवार जंगल के बीच रहने को मजबूर हैं। न जमीन मिली, न पूरा मुआवजा। ऊपर से जंगली जानवरों का खौफ भी। वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा सर्वे सहित तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वर्ष 2022 में ग्राम गुलखेड़ी के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। वर्तमान में गुलखेड़ी गांव में 18 से 20 परिवार ऐसे हैं, जो लगातार विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार वन विभाग और प्रशासन से नियमानुसार विस्थापन की मांग कर चुके हैं। वन विभाग के अनुसार विस्थापन के लिए दो पैकेज दिए जा रहे हैं। पहले कैश पैकेज के तहत प्रति परिवार 15 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। दूसरे लैंड पैकेज में खातेदारी के बराबर भूमि के साथ एक हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि देने का प्रावधान है। गुलखेड़ी गांव के सर्वे में 215 परिवार चिह्नित किए गए थे। इनमें से 213 परिवार विस्थापन के लिए सहमत हुए, जबकि 2 परिवार असहमत रहे। 193 परिवारों ने वन विभाग का कैश पैकेज लिया है, जबकि 20 परिवारों ने जमीन के बदले जमीन की मांग की है।
इनसेट में : रामगढ़ रिजर्व का बाघ


