अनूठी शुरुआत…:2000 बीएसएफ जवानों का संयुक्त परिवार, सुख दुख में बेटों की तरह करते हैं शहीद हुए जवान के परिजन की मदद

बीएसएफ के जवानों ने देश सेवा के साथ-साथ शहीद हुए साथियों के परिवारों की सुरक्षा और मदद के लिए एक अनूठी शुरुआत की है। उन्होंने एक सोशल मीडिया ग्रुप भी बनाया है। इसमें 2 हजार से अधिक बीएसएफ जवान जुड़ चुके हैं। वे आने वेतन से चंदा इकट्ठा कर शहीदों के परिवार की आर्थिक मदद कर रहे हैं। अब तक प्रदेश में 10 शहीद जवानों के परिवार की की सहायता कर चुके हैं। सेवानिवृत्ति डिप्टी कमाडेंट संतोष साहू ने बताया कि दो साल पहले आरंग निवासी जवान बाल्मीकि सिन्हा की ड्यूटी नक्सली प्रभावित जिले नारायणपुर के सारंगीपाल लगाई गई थी। ड्यूटी के दौरान वे शहीद हो गए। आरक्षक के शहीद होने की खबर उनके सोशल ग्रुप में डलते ही रायपुर हेडक्वार्टर में ड्यूटी पर तैनात साथी आरक्षक पवन राठौर, विकास श्रीवास, राहुल श्रीवास, संजय गिरी गोस्वामी, आदित्य सिंह, यशवंत साहू उनके अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति देख उनकी मदद करने का संकल्प लिया। सभी दोस्तों ने मिलकर मिलकर पैसे जुटाए और शहीद हुए जवान के परिवार को सौंप दिए। जब इसकी जानकारी ड्यूटी पर तैनात अन्य जवानों को लगी तो उन्होंने भी मदद करने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद बीएसएफ कर्मचारी परिवार ग्रुप नाम का एक सोशल ग्रुप बनाया। इसमें अब तक 2000 से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं। किसी जवान के परिजन को जरूरत होने पर प्रत्येक जवान अपनी इच्छानुसार मदद करता है। इस अभियान में जो धनराशि जमा होती है, उसे शहीदों के परिवारों के भरण-पोषण, चिकित्सा और बच्चों की शिक्षा में खर्च की जाती है। नक्सली क्षेत्र में सामाजिक रीति-रिवाज से किया अंतिम संस्कार: रिटायर्ड बीएसएफ के जवान मृगेंद्र राठौर ने बताया कि वर्ष 2023 में दंतेवाड़ा के बारसूर में रहने वाले भुनेश नेताम ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। शहीद होने के बाद उसका पार्थिव शरीर गांव लाया गया, मगर शहीद भुनेश के पिता की दो शादी हुई थीं। छुट्टी पर आए जवान को शहीद परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी रिटायर्ड बीएसएफ के जवान मनीष देवांगन ने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगभग 2 हजार से अधिक जवान देश की सीमाओं में तैनात हैं। इस ग्रुप के माध्यम से रिटायर्ड जवान और जो भी जवान छुट्टी पर घर आता है तो उसकी जिम्मेदारी शहीद जवान के परिवार की देखरेख की होती है। छुट्टी पर आया जवान उनके घर पहुंचकर उनकी स्थिति की जानकारी वाट्सएप ग्रुप में अपडेट करता है। साथ ही ग्रुप के सदस्य यथासम्भव पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आते हैं। इस पहल में शहीदों के परिवार के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं भी शामिल नहीं है। मानसिक और भावनात्मक समर्थन किया जाता है।

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