2024-25 सत्र में एमडी-एमएस प्रवेश प्रक्रिया में 9 महीने की देरी हो चुकी है। इसका असर आने वाले बैचों पर भी पड़ेगा। अन्य राज्यों में तो नीट पीजी काउंसिलिंग के दो राउंड पूरे हो चुके हैं, लेकिन मप्र में पहला राउंड भी शुरू नहीं हो पाया है। प्रदेश में पहले ही 1000 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में एमडी-एमएस पाठ्यक्रमों में विलंब ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। नियमों के अनुसार एमडी-एमएस में दाखिला मई तक हो जाता था। लेकिन इस बार अब तक यह तय नहीं है कि 2024-25 सत्र का प्रवेश कब शुरू होगा।
गौरतलब है कि नीट पीजी में सेवारत उम्मीदवारों की मेरिट सूची में गड़बड़ी के कारण हाईकोर्ट ने प्रक्रिया रोक दी, जिससे नए सिरे से सूची बनाने की जरूरत पड़ी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण ओपीडी और भर्ती मरीजों को देखभाल में देरी हो रही है। समय पर डिग्री पूरी न होने से डॉक्टर न तो पढ़ाई आगे बढ़ा पा रहे हैं और न ही नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं। हालांकि, नीट पीजी में इन सर्विस कोटे के गलत निर्धारण को लेकर परीक्षा कराने वाली एजेंसी नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। मप्र सरकार और डीएमई को भी रिस्पॉन्डेंट के रूप में पार्टी बनाया है। अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। ये है समाधान अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्य प्रदेश की सरकार को केंद्रीय एजेंसी से बात करके भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करने की अनुमति दी लेनी चाहिए, इससे न केवल डॉक्टरों का समय बचेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में न सिर्फ आज बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार भी होगा। -डॉ. आकाश सोनी, नेशनल एक्जीक्यूटिव मेम्बर, फेडरेशन ऑफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा)


