अपोलो सेज अस्पताल में पहली बार व्हिपल पैंक्रिएटिकोडुओडेनेकटोमी की जटिल सर्जरी की गई। यह ऑपरेशन पेट और पैंक्रियाज के कैंसर में किया जाने वाला सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मरीज को पहले नागपुर के प्रतिष्ठित गैस्ट्रो सेंटर में इलाज दिया जा रहा था। वहां सर्जरी के अत्यधिक जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें एलएएमए (लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) के तहत भोपाल रेफर किया। मामला इतना जटिल था कि पैंक्रियाज की डक्ट केवल 2-3 मिमी की थी और पहले से लगे बाहरी कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) स्टेंट के कारण गंभीर फाइब्रोसिस हो गया था। यह सर्जरी 6-8 घंटे तक चली, जिसमें पैंक्रियाज के हिस्से को काटकर और दोबारा डिज़ाइन कर मरीज का जीवन बचाया गया। यह न केवल सर्जनों के कौशल का परीक्षण था, बल्कि आईसीयू और एनेस्थीसिया टीम की उत्कृष्ट देखभाल ने भी अहम भूमिका निभाई। सर्जरी के बाद मरीज ने तेजी से रिकवरी की और सिर्फ 7वें दिन बिना किसी जटिलता के अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इस सफलता के साथ, अपोलो सेज अस्पताल ने पेट और पैंक्रियाज कैंसर की सर्जरी के पूरे स्पेक्ट्रम को कवर कर लिया है। अस्पताल अब हाई-रिस्क सर्जरी के लिए मध्यप्रदेश का अग्रणी केंद्र बन गया है। डॉ. सौरभ दुबे और उनकी टीम ने कहा, व्हिपल ऑपरेशन को दुनिया की सबसे कठिन सर्जरी में से एक माना जाता है। यह ऑपरेशन हमारे कौशल, टीमवर्क और अत्याधुनिक तकनीक का नतीजा है। अब भोपाल जैसे शहर में भी विश्वस्तरीय कैंसर सर्जरी संभव है। सर्जरी के बाद मरीज का जीवन 5 साल तक बढ़ सकता है, और यह पेट के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है।


