भागीरथपुरा आपदा ने निगम के जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच समन्वय की कमी को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त दिलीप यादव को हटा दिया गया। वहीं अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अक्षीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया। भास्कर पड़ताल में यह बात सामने आई कि इंदौर ही नहीं अन्य नगरीय निकायों की भी यही स्थिति है। भोपाल में नगर निगम के चार अफसर बदले गए। इसमें निगमायुक्त का तबादला भी शामिल रहा। ग्वालियर में एक से डेढ़ माह पहले अफसरों का विरोध क्षेत्रीय संगठन मंत्री तक पहुंचा। उज्जैन में भी अफसर बदलने के बाद ही स्थिति संभली। भोपाल निगम : 3 माह पहले तक यही स्थिति थी भोपाल नगर निगम में तीन महीने पहले तक भाजपा पार्षदों का ही एक ग्रुप था जो कहता आया कि अधिकारी हमारे सुनते नहीं। नाराजी कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर तक के अफसरों से थी। निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने कैबिनेट मंत्री का फोन नहीं उठाया, सांसद की बैठक में नहीं गए, मामला केंद्र तक पहुंचा। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। वहीं अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान, अपर आयुक्त निधि सिंह व एक सहायक आयुक्त का भी जनप्रतिनिधियों से समन्वय नहीं होने पर तबादला हुआ। ग्वालियर निगम : संगठन मंत्री को पार्षदों ने बताई अपनी पीड़ा नवंबर में जब एसआईआर के लिए भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल वहां पहुंचे और पार्षदों की मीटिंग ली तो सभी ने कहा, हमारी कोई सुनवाई नहीं, न काम हुए। तब जामवाल ने कहा कि एक पत्र सीएम को, एक प्रभारी मंत्री, एक नगरीय प्रशासन मंत्री को और एक हमें भी दो, हम चर्चा करेंगे। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक फंड ही नहीं होगा तो काम क्या और कैसे करेंगे? उज्जैन नगर निगम : फाइल अटकाने पर प्रदर्शन हुए उज्जैन नगर निगम सूत्रों के मुताबिक पूर्व निगमायुक्त आशीष पाठक के सामने कई बार धरना प्रदर्शन हुए। दोनों दलों के पार्षद विरोध कर चुके थे। आरोप था फाइलों पर साइन नहीं होती। अब यहां निगमायुक्त तीन महीने पहले ही बदले जा चुके हैं। क्षितिज सिंघल नए निगमायुक्त भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव के तबादले के बाद शनिवार को 2014 बैच के आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम का नया निगमायुक्त नियुक्त किया गया। उन्होंने शनिवार को ही काम संभाल लिया। नगर निगम के इतिहास में दिलीप कुमार यादव का कार्यकाल सबसे छोटा रहा। उनकी नियुक्ति 9 सितंबर को हुई थी और वे करीब चार महीने ही निगमायुक्त रह सके। क्षितिज सिंघल को प्रशासनिक हलकों में बेबाक अधिकारी के रूप में जाना जाता है। इससे पहले वे उज्जैन नगर निगम और बिजली कंपनी में सेवाएं दे चुके हैं। उनकी पत्नी शीतला पटले भी आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सिवनी की कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। सिंघल कुछ वर्ष पहले 1 जनवरी को बिना मुहूर्त कोर्ट मैरिज करने को लेकर चर्चा में आए थे। प्रशासनिक हलकों में माना जाता है कि उनकी कार्यशैली कई बार नेताओं से मेल नहीं खाती, लेकिन फैसलों में वे स्पष्ट और सीधे रुख के लिए जाने जाते हैं।


