भागीरथपुरा में दूषित पानी की चपेट में 69 बोरिंग भी आ चुके हैं। भागीरथपुरा में करीब 3 हजार 700 घर हैं, जिनमें 40 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां पानी की टंकी महज दो मीटर तक ही भर पाती है। ज्यादातर परिवार बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। 69 बोरिंग नर्मदा लाइन से जुड़े मिले। इनके कनेक्शन हटा दिए गए हैं। इन सभी बोरिंग में क्लोरीनेशन भी कराया गया। लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी बोरिंग का पानी इस्तेमाल न करें। बोरिंग के पानी के सैंपल भी लिए हैं। अब तक मैपिंग नहीं पहला मरीज 24 दिसंबर को मिला था, लेकिन इसके बाद बीमारी कहां-कहां और कैसे फैली, इसकी कोई स्पष्ट मैपिंग अब तक नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी माना है कि मरीजों में हैजा पाया गया है, लेकिन संक्रमण की चेन अब भी अधूरी है। निगम प्रशासन भी तय नहीं कर पाया है कि गंदा पानी किसी एक पॉइंट से फैला या फिर पूरा लाइन सिस्टम ही प्रदूषित हो चुका था। बोरिंग भूजल उपयोग के लिए होते हैं, पर भागीरथपुरा में बोरिंगों को नर्मदा लाइन से जोड़ दिया गया। जागरूकता पर जोर : प्रभावित घरों के आसपास 50-50 घरों की जांच शुरू भागीरथपुरा में अब पूरा जोर जागरूकता पर है। शनिवार सुबह से प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इसी पर फोकस किया। कलेक्टर शिवम वर्मा सुबह 6.30 बजे टीमों के साथ पहुंचे। घरों में टैंकर के माध्यम से किए जा रहे पेयजल वितरण का जायजा लिया। टैंकर से पानी पीकर देखा। यहां पीएचई, ड्रेनेज सीवरेज विभाग, सफाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ एनजीओ टीम के 200 से ज्यादा सदस्यों को काम पर लगाया है। क्षेत्र का रिंग सर्वे शुरू करते हुए टीमों के माध्यम से डोर टू डोर नागरिकों को निगम टैंकर के माध्यम से उपलब्ध पानी का ही उपयोग करने की घोषणा की जा रही है। नागरिकों से अपील की जा रही है कि केवल टैंकर से वितरित पानी का ही उपयोग करें।


