बैतूल जिले के मुलताई में एक किसान अफ्रीकन गेंदा के फूल उगा रहा है। एक एकड़ जमीन में फूलों की खेती कर प्रति एकड़ एक लाख रुपए की कमाई कर रहा है। इन फूलों का उपयोग दवा और खाद बनाने में किया जाता है। दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में बात मुलताई के सिरसावाड़ी गांव के रहने वाले काशीनाथ खाड़े की। उनकी सफलता की कहानी काशीनाथ की जुबानी जानते हैं…. पहली बार में ही मिलने लगा मुनाफा
काशीनाथ बताते हैं कि हमारे पास 9 एकड़ जमीन है। पिछले 25 साल से खेती कर रहा हूं। अभी तक सोयाबीन, गेहूं और मक्का जैसी परंपरागत फसलें उगाता रहा था। कभी मौसम खराबी, तो कभी कीट प्रकोप के कारण लागत भी निकल पाना मुश्किल हो रहा था। वैकल्पिक फसल लगाकर बेहतर मुनाफा कमाने का रास्ता तलाश रहा था। पिछले साल की बात है। गांव में पांढुर्णा जिले की प्राइवेट कंपनी के कुछ लोग गए। बताया कि कंपनी फूलों से खाद और दवा बनाने का काम करती है। बताया गया कि बीज और तकनीकी मार्गदर्शन कंपनी की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। उगने वाले फूल को खेत से ही 10 रुपए किलो के हिसाब से खरीदने की बात कही। ऑफर पसंद आया। अफ्रीकन मैरीगोल्ड के बीज 2700 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से कंपनी की ओर से ही दिए गए। वहीं, खाद और दवाइयों पर करीब 10 हजार रुपए प्रति एकड़ का खर्च आया। डेढ़ महीने में तैयार हो जाती है फसल
काशीनाथ ने बताया कि गेंदे के फूल की यह फसल डेढ़ महीने में तैयार हो जाती है। एक फसल में करीब 10 बार फूलों की तुड़ाई की जा सकती है। पहली बार चार एकड़ में अफ्रीकन गेंदा लगाया। इस तरह प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपए का मुनाफा मिल रहा है। सबसे बड़ी बात कि यह नकदी फसल है। अगले साल से 9 एकड़ में गेंदा उगाने की योजना है। हर हफ्ते 5000 किलो फूल निकलते हैं
काशीनाथ का कहना है कि शुरुआत में नर्सरी बनाकर रोपा तैयार किया जाता है। करीब एक महीने बाद पौधों की रोपाई की जाती है। नियमित खाद-पानी दिया जाता है। रोग नियंत्रण के लिए समय-समय पर जैविक खाद भी दी जाती है। करीब दो महीने बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं। हर हफ्ते करीब पांच हजार किलो फूल निकलते हें। दो से तीन महीने तक तुड़ाई चलती है। कंपनी ले जाती है सारे फूल
काशीनाथ बताते हैं कि कंपनी से करार की शर्तों के मुताबिक बाजार में फूल बेचने पर मना है। हर हफ्ते कंपनी के लोग आते हैं। हमारा पूरा परिवार पत्नी और दोनों बच्चे फूलों की तुड़ाई करते हैं। इसके बाद कंपनी के लोग फूल ले जाते हैं। कुछ दिन में पेमेंट भी मिल जाता है। अभी तक दो लाख रुपए मिल चुके हैं। तुड़ाई का काम शाम को किया जाता है, जिससे फूल खराब नहीं हों। कंपनी इन फूलों से दवाई और खाद बनाती है। ये भी पढ़ें… मां की सलाह पर अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ बने किसान: लहसुन की नई किस्म ‘धमनार क्रांति’ तैयार की, रजिस्ट्रेशन के लिए भी भेजा मंदसौर जिले के एक अकाउंटेंट मां की सलाह पर नौकरी छोड़ किसान बन गया। मेहनत और लगन से लहसुन की नई किस्म तैयार कर डाली। इस किस्म को गांव के नाम पर ही ‘धमनार क्रांति’ नाम दिया है। किसान ने इसे कृषि विभाग के सहयोग से रजिस्ट्रेशन के लिए भेजा है। पढ़ें पूरी खबर…


