अब एडिक्शन में बदला ऑनलाइन गेमिंग:पांच साल में ही करोड़ों गंवा चुके शहर के युवा, पहले महीने में 10-12 केस आते थे, अब दोगुना

शहर में ऑनलाइन गेमिंग युवाओं में एडिक्शन यानी ड्रग्स की लत की तरह होने लगा है। वे पांच साल में ही करोड़ों रुपए पोकर जैसे खेलों में गंवा चुके हैं। पहले महीने में 10-12 केस आते थे, जिनकी संख्या अब 25 से 30 तक पहुंच गई है। यानी हर दिन कम से कम एक केस तो डॉक्टर्स के पास पहुंचने लगा है। सांसद शंकर लालवानी के बेटे मीत को मिले बैंक के नोटिस के बाद भास्कर ने एक्सपर्ट के साथ मिलकर पड़ताल की तो ढेर सारे मामले सामने आए। मनोचिकित्सक इसे ड्रग्स की ही तरह एडिक्शन मानते हैं। कुछ मामलों में इसके लिए डिप्रेशन, अकेलापन जैसी स्थितियों को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। 35 वर्षीय युवक ने गंवाए 15 करोड़ रुपए शहर के एक बड़े बिल्डर के 35 वर्षीय बेटे को भी पांच साल से ऑनलाइन गेमिंग, सट्‌टेबाजी की लत लगी। घर वालों से छुपकर 15 करोड़ की भारी रकम गंवा दी। घर वालों को जब पता चला तो डॉक्टर के पास गए। 6 महीने का समय लगा कई बार थैरेपी, काउंसलिंग और दवाई से लत छुड़ा पाए। परिजन ने पुश्तैनी घर बेचकर चुकाया 40 लाख का कर्ज आईटी प्रोफेशनल युवा इसी लत के चक्कर में 40 लाख के कर्ज में डूब गया। मंगेतर के परिजन को भनक लगी तो वे रिश्ता तोड़ने पर आ गए। डिप्रेशन में युवक ने खुदकुशी की कोशिश की। परिजन ने पुश्तैनी घर बेचकर उसका कर्ज चुकाया। लंबे ट्रीटमेंट के बाद वह ठीक हो सका। आत्महत्या के विचार आने लगे तो समझ आई हकीकत 40 साल के बिजनेसमैन ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में फंसकर 30 लाख रुपए गंवा चुके। शुरुआत में उन्हें गेम खेलने के दौरान रिवॉर्ड्स भी मिलते थे जिसके चलते उन्हें मजा आने लगा। जब हारने लगे तो आत्महत्या जैसे विचार आने लगे, प्रोफेशनल की मदद ली तब जाकर आदत से बाहर निकल सके। कोविड के बाद से ही बढ़ रहे ऐसे मामले डॉक्टर्स का कहना है कि इस तरह के मामले कोविड के बाद ज्यादा सामने आने लगे हैं। कोविड से पहले महीने में 2 या 4 मामले ही डॉक्टर तक पहुंचते थे। हर साल इनमें 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना 7 घंटे चला रहे मोबाइल एमजीएम मेडिकल कॉलेज में असि. प्रोफेसर डॉ. कौस्तुभ बागुल की स्टडी के मुताबिक देश में 73% लोग मोबाइल पर अत्यधिक निर्भर हैं। 80% युवा सबक्लिनिकल डिप्रेशन यानी अवसाद से पीड़ित हैं। बड़ी आबादी औसत 7 घंटे स्क्रीन पर बीता रही है। एक साल में करीब 1800 घंटे यानी लगभग 75 दिन सिर्फ स्क्रीन देखने में खर्च हो रहे हैं। इससे कई बीमारियां हो रही हैं। बचने के लिए डिजिटल डिटाक्स, स्क्रीन टाइम लिमिट्स जरूरी है। गंवाई रकम पाने की सनक में फंसते हैं कई ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पहली बार ऐप पर आने वाले ग्राहकों को रिवार्ड्स देते हैं। उसे कुछ प्राइज मनी जीतने का मौका देते हैं। टाइम पास के लिए जुड़ा युवा इसके फेर में पड़कर आर्थिक नुकसान कर बैठता है। नुकसान को कवर करने के चक्कर में और दलदल में फंसने लगता है और पीछे नहीं लौट पाता।

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