इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद नगरीय प्रशासन विभाग लगातार डैमेज कंट्रोल मोड में है। शुक्रवार को नगरीय निकायों के लिए पेयजल से जुड़ी एसओपी जारी करने के बाद शनिवार को विभाग ने जिला कलेक्टरों के लिए निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टरों से कहा है कि पेयजल में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इन निर्देशों में जल स्रोतों की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और पाइपलाइन नेटवर्क की निगरानी को प्राथमिकता देने को कहा गया है। एसीएस नगरीय प्रशासन संजय दुबे द्वारा निर्देशों में कहा गया है कि हर जल स्रोत से सप्लाई से पहले सैंपल जांच अनिवार्य होगी। कहीं भी ई. कोलाई या अन्य हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाने पर तुरंत उस क्षेत्र की जल आपूर्ति रोककर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। ऐसे क्षेत्रों की लिस्टिंग के निर्देश हैं जहां पूर्व में पानी से जुड़ी बीमारियां फैल चुकी हैं और प्रशासन ने रोकथाम की थी। ऐसे क्षेत्र लिस्ट करेंगे जिनमें नाली के ऊपर या क्रॉस करके पानी की सप्लाई लाइन गई है, पाइपलाइन बहुत पुरानी है या लगातार टूट फूट होती रहती है। पानी से जुड़ी शिकायतों की लिस्टिंग करके कारण भी रिकॉर्ड में लिखे जाएंगे। कहीं भी वॉल्व, चैम्बर में टूट फूट हो तो तुरंत मरम्मत हो। रोज पानी के सैंपल लेकर टेस्टिंग हो। गड़बड़ी मिले तो तुरंत सुधार हो। आकस्मिक संयुक्त निरीक्षण भी करें
प्रशासन जलापूर्ति व्यवस्था का आकस्मिक निरीक्षण करें। जिला स्तरीय रिव्यु एंड मॉनिटरिंग कमेटी की लगातार बैठकें आयोजित हों। उपभोक्ताओं को भी समझाएं कि पेयजल सप्लाई लाइन को खुला न छोड़ें। सीवर लाइन पर लगातार ध्यान दें। साथ ही, टंकियों की सफाई, लीकेज पाइपलाइन की मरम्मत और सीवेज लाइनों से पानी की मिलावट रोकने के लिए संयुक्त निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं।


