मध्य भारत के मरीजों के लिए अब प्लेसेंटा (गर्भनाल) की ऊपरी झिल्ली (एम्नियोटिक मेम्ब्रेन) को एक साल तक इंदौर में संरक्षित रखा जा सकेगा। इससे न केवल आग से जले बल्कि केमिकल बर्न और दुर्घटनाओं आदि में बुरी तरह घायल होने वाले मरीजों के इलाज में तेजी आएगी। साथ ही ऐसे मरीजों के बचने के अवसर बढ़ जाएंगे। इसके अलावा कॉर्निया, आंख की सतह, स्किन सेल्स आदि से जुड़ी कई बीमारियों के इलाज में भी मदद मिलेगी। श्री अरबिंदो अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. महक भंडारी ने बताया कि इस प्रकार की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा, अब तक देश के चुनिंदा मेट्रो शहरों के गिने-चुने अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं। मध्य भारत में यह सुविधा नहीं होने से यहां के मरीजों और उनके परिजनों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी को देखते हुए श्री अरबिंदो अस्पताल ने यह पहल की है। इसका फायदा इंदौर और आसपास के दूसरे अस्पतालों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्हें अनेक जटिल और गंभीर रोगों से जल्द राहत मिलेगी और कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। दस मरीजों का इलाज कर सकती है एक गर्भनाल की ऊपरी झिल्ली
सीनियर डॉ. श्रेया थत्ते और सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुष्मित कोस्टा ने बताया कि फिलहाल गर्भनाल के ऊपरी आवरण को अस्पताल में एक साल तक -80 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर स्पेशल रेफ्रिजरेटर में प्रिजर्व रखा जाएगा। इसकी गुणवत्ता की हर दो सप्ताह में नियमित रूप से जांच भी की जाएगी। खास बात यह है कि गर्भनाल की एक ऊपरी झिल्ली से अलग-अलग बीमारियों से ग्रस्त लगभग 10 मरीजों का इलाज हो सकेगा। सामान्य परिस्थितियों में एक गर्भनाल का फायदा अलग-अलग ब्लड ग्रुप वाले मरीजों को मिल सकता है। इसमें किसी तरह का कोई रिजेक्शन नहीं होता है।


