अब तकनीक से जांच:एआई बेस्ड अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स रे मशीन से होगी अब टीबी की जांच

ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के रोगियों की जांच अब एआई बेस्ड अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स रे मशीन से होगी। बीकानेर को तीन मशीनें मिलेंगी, जिसमें से एक आ गई है। इससे केंद्रीय जेल में बंदियों की स्क्रीनिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। एआई-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी की जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस हैंडहेल्ड (हाथ में पकड़ी जाने वाली) एक्स-रे मशीनें तैनात करने की तैयारी की जा रही है। ये मशीनें तुरंत एक्स-रे लेती हैं और बिना रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता के टीबी के संभावित लक्षणों (फेफड़ों पर सफेद धब्बे) की पहचान कर सकती हैं। ग्रामीणों को जांच के लिए शहर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टीबी के लक्षण मिलने पर घर बैठे ही उनका इलाज शुरू हो जाएगा। संबंधित पीएचसी, सीएचसी पर दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे का उपयोग खास तौर पर टीबी रोगियों की पहचान करने में कारगर साबित होगा। इसके लिए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग के लिए कार्यक्रम चलाया जाएगा। गौरतलब है कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीबी के बढ़ते उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए जांच उपकरण के रूप में एक्स-रे की पेशकश करके टीबी की शुरुआती पहचान के लिए एक नई रणनीति तैयार की है। ऐसे काम करेगी मशीन एआई बेस्ड अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स रे मशीन से एक दिन में 150 मरीजों का एक्स रे लिया जा सकेगा। गांव में बैठा रेडियोलॉजिस्ट मरीजों का एक्स रे लेकर सीधे जिला क्षय रोग क्लिनिक या संबंधित सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टर को भेज सकेंगे। मात्र तीन-चार किलो वजनी मशीन बैटरी ऑपरेटेड है। डिजिटल और एआई इनोवेशन कफ अगेंस्ट टीबी जैसे एआई-आधारित समाधान और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम भी कार्यक्रम में शामिल किए जा रहे हैं ताकि सक्रिय मामलों की पहचान और निगरानी वास्तविक समय पर की जा सके। इसके तहत गांवों में आशाओं और एएनएम के एंड्रॉयड मोबाइल में एआई बेस्ड एक सोफ्टवेयर अपलोड किया जाएगा, जिसके जरिए वे मरीजों की खांसी को ​रिकॉर्ड करेंगी। यह सॉफ्टवेयर खांसी की आवाज सुनकर संभावित टीबी के संकेत देगा। इसकी ट्रेनिंग शुरू हो गई है। ये सिस्टम इलाज तो नहीं बताएगा मगर अनुसंधान तेजी से होगा और इसका सीधा लाभ मरीजों को होगा क्योंकि जल्दी डाइग्नोस होने के बाद समय से इलाज उपलब्ध हो सकेगा। पहले लोग खांसते रहते थे और टीबी की जांच तब कराते थे जब दवाएं फायदा नहीं करती थीं। लोगों को इसके प्रति जागरूक और करने की जरूरत होगी। “टीबी के रोगियों की स्क्रीनिंग के लिए अब एआई बेस्ड तकनीक आ गई है। एक एआई बेस्ड अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स रे मशीन मिली है, जिससे केंद्रीय जेल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। वहां रोज 50-60 बंदियों की जांच हो रही है। अभी दो मशीनें और आनी हैं। मोबाइल पर खांसी रिकॉर्ड करने का प्रोजेक्ट भी जल्दी ही शुरू होगा।”
-डॉ. सीएस मोदी, जिला क्षय रोग अधिकारी

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