नमामि गंगे परियोजना के तहत झारखंड की नदियों का भी कायाकल्प होगा। पहले चरण में पांच जिले रांची, धनबाद, आदित्यपुर, चास, साहिबगंज आैर राजमहल की नदियों की सूरत बदलेगी। रांची में स्वर्णरेखा नदी आैर हरमू नदी का कायाकल्प किया जाएगा। इसके अलावा गंगा, दामोदर व खरकई नदियों को भी विकसित किया जाएगा। इन नदियों का प्रबंधन कर जल को स्वच्छ बनाया जाएगा। इसके साथ ही रीवर फ्रंट डेवलपमेंट, पार्क डेवलपमेंट, प्लांटेशन इत्यादि गतिविधियों को बढ़ावा देकर एक ईको फ्रेंडली वातावरण भी विकसित किया जाएगा। ये बातें नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने बुधवार को स्टेशन रोड स्थित एक होटल में नदियों के संरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में कही। छोटी नदियों को भी योजना में मिले जगह विभागीय प्रधान सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के नमामि गंगे योजना का लाभ उन राज्यों को ज्यादा मिलता है, जहां गंगा का क्षेत्र ज्यादा है। झारखंड में मात्र 80 किमी ही गंगा क्षेत्र है। इसलिए हमारी अन्य सहायक नदियों को इस योजना से जोड़ा जाए। ये सभी नदियां गंगा में ही अपना जल छोड़ती हैं। इसलिए इसका फायदा गंगा के जल को स्वच्छ बनाए रखने में मिलेगा। वहीं, नमामि गंगे परियोजना निदेशक सूरज कुमार ने कहा कि जल संसाधन, पर्यटन, पेयजल व स्वच्छता विभाग, उद्योग विभाग के साथ बैठक कर सभी नगर निकाय रास्ता निकालें। हर शहर के लिए स्पेशिफिक प्लान बने सुनील कुमार ने कहा कि हर शहर में अलग प्रकार की चुनौतियां हैं। इसलिए हर शहर के लिए स्पेशिफिक प्लान बने। झारखंड में बहनेवाली नदियों के संरक्षण, जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और प्रबंधन में राज्य सरकार पहले से ही कई कार्यक्रम चला रही है। हमारी कोशिश है कि शहरी विकास के लिए नदियों को प्राथमिकता सूची में रखा जाए। इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पथ निर्माण विभाग आसपास की नदियों पर रीवर फ्रंट डेवलमेंट, एसटीपी निर्माण, प्लांटेशन और ईको फ्रेंडली वातावरण बनाने पर कार्य कर रहे हैं।


