अभी हर माह हार्ट की 12 से 15 जटिल सर्जरी हो रही, मशीन आने से 25 होंगी

रिम्स के कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग में हृदय व फेफड़ों से जुड़ी जटिल सर्जरी को लेकर बड़ी पहल की जा रही है। प्रबंधन ने एडवांस हार्ट-लंग मशीन की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इस अत्याधुनिक मशीन के रिम्स आने के बाद ओपन हार्ट सर्जरी की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और मरीजों का वेटिंग पीरियड भी काफी हद तक कम हो जाएगा। वर्तमान में सीटीवीएस विभाग में हर महीने औसतन 12 से 15 ओपन हार्ट सर्जरी हो पा रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, नई हार्ट-लंग मशीन के आने के बाद यह संख्या बढ़कर 25 से 30 प्रतिमाह तक पहुंच सकती है। रिम्स में फिलहाल एक ही हार्ट-लंग मशीन उपलब्ध है, जिससे हर ओटी वाले दिन केवल एक सर्जरी संभव हो पाती है। दूसरी मशीन आने से एक ही दिन में दो सर्जरी करने का रास्ता खुलेगा। मशीन की अनुमानित कीमत 1.2 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपए के बीच है।
पिछले 3-4 वर्षों में बढ़े हार्ट सर्जरी के मरीज सीटीवीएस विभाग के डॉक्टरों के अनुसार 3-4 साल पहले तक रिम्स में हार्ट सर्जरी के लिए मरीजों की संख्या काफी कम थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में लोगों का भरोसा बढ़ा है और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि अब संसाधनों के विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अगर नई हार्ट-लंग्स मशीन के साथ मैनपावर और ओटी की सुविधाएं भी बढ़ा दी जाती हैं तो रिम्स में हार्ट के मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। इससे गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। नई मशीन आने के बाद काफी कम होगा दबाव जानकारी के अनुसार, रिम्स में हर महीने हार्ट और लंग से जुड़ी जटिल सर्जरी के लिए 30 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण इनमें से आधे मरीजों की ही सर्जरी हो पाती है, जबकि शेष को लंबा इंतजार करना पड़ता है या बाहर रेफर होना पड़ता है। नई मशीन के आने से इस दबाव में काफी कमी आने की उम्मीद है। मशीन की अनुमानित कीमत 1.2 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपए है हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हार्ट-लंग्स मशीन की खरीद से ही सर्जरी की संख्या नहीं बढ़ेगी। इसके लिए मैनपावर सपोर्ट बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। वर्तमान में सीटीवीएस विभाग में केवल दो सर्जन कार्यरत हैं। विभाग में दो ऑपरेशन थिएटर मौजूद हैं, लेकिन सपोर्ट स्टाफ की कमी के कारण सिर्फ एक ओटी ही पूरी तरह फंक्शनल है। दोनों ऑपरेशन थिएटर को एक साथ चालू रखने के लिए दो पूर्ण ओटी टीम की आवश्यकता होगी। एक टीम में सर्जन के अलावा परफ्यूजनिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ शामिल होते हैं। फिलहाल विभाग में केवल एक ही ओटी टीम उपलब्ध है, जिससे कार्यक्षमता सीमित हो रही है।

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