गौरेला पेंड्रा मरवाही के अमरकंटक में पतित पावनी मां नर्मदा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। नर्मदा उद्गम परिसर से निकली विशाल शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह की शुरुआत भव्य नर्मदा आरती से हुई। दिन भर मंदिर परिसर में पूजा-पाठ का क्रम जारी रहा। शोभायात्रा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन के साथ नगर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। युवा और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा वातावरण जगह-जगह स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। नर्तक दलों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जबकि भक्तगण धार्मिक ध्वज-पताकाएं लेकर चलते रहे। गुदुम बाजे की थाप और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। ऐसे हुआ नर्मदा नदी का उद्गम करोड़ों साल पहले सतपुड़ा और विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के बीच अवस्थित अमरकंटक के आम्रकुंज से नर्मदा नदी का उद्गम हुआ। पर्वतमालाओं की कंदराओं से पश्चिम की ओर बहती हुई 1312 किलोमीटर दूर खंभात की खाड़ी में ये नदी सागर से मिलती है। नर्मदा महोत्सव की परंपरा की शुरुआत दोनों तटों पर छोटे-बड़े लगभग दस हजार से अधिक तीर्थ स्थल हैं। यहां की संस्कृति, अध्यात्म और जैव विविधता के संरक्षण के लिये उद्गम स्थल अमरकंटक में बीते कुछ सालों से नर्मदा महोत्सव की परंपरा शुरू की गयी है। 5 फरवरी तक चलेगा महोत्सव महोत्सव 3-5 फरवरी 2025 तक आयोजित किया जाएगा। कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने रविवार को मेला ग्राउंड का निरीक्षण किया और रामघाट के उत्तर और दक्षिण तट की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। महोत्सव को भव्य रूप देने में लगे अधिकारी साथ ही मां नर्मदा मंदिर परिसर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को भी देखा। इस दौरान अनूपपुर के कलेक्टर हर्षल पंचोली ने उन्हें आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने महोत्सव को भव्य रूप से आयोजित करने की तैयारियों पर चर्चा की।


