अमृतसर से शुरू होकर किसान मजदूर मोर्चा भारत, पंजाब चैप्टर की ओर से 21 और 22 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार की निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ पंजाब भर में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान स्मार्ट मीटर उतारकर उन्हें नजदीकी बिजली घरों में जमा कराने का आह्वान किया गया। यह कार्यक्रम अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, मोगा, लुधियाना, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला और मोहाली सहित कई जिलों में लागू किया गया। मोर्चे ने आरोप लगाया कि विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संस्थानों के निर्देशों पर केंद्र की मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के हित में नीतियां लागू कर रही है, जो आम जनता के खिलाफ हैं। किसान मजदूर मोर्चा का कहना है कि केंद्र सरकार बिजली, बीज बाजार, पानी, शिक्षा और कृषि जैसे विषयों में राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देकर संविधान और संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। आरोप लगाया गया कि पंजाब सरकार इन नीतियों का विरोध करने की बजाय केंद्र के साथ मिलकर इन्हें लागू कर रही है और उभरते जन आंदोलनों को बदनाम कर दबाने की कोशिश कर रही है। मोर्चे ने चेतावनी दी कि ये नीतियां सिर्फ किसानों और मजदूरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल के जरिए छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी वालों के रोजगार को भी धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। संगठन ने का कहना है कि पंजाब में नशे की समस्या चरम पर है, बेरोजगार युवाओं को अपराध की ओर धकेला जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मोर्चे ने प्रेस की आवाज दबाने के खिलाफ होने वाले आंदोलन का समर्थन किया और 5 फरवरी को पंजाब के विधायकों व मंत्रियों के घरों का घेराव करने का ऐलान किया।


