अमेरिकी-उपराष्ट्रपति की पत्नी को पसंद आए जयपुर के हनी लड्‌डू:ठंडाई भी यूएस के लिए पैक करवाई; शिल्पा शेट्‌टी, अमिताभ बच्चन की भी फेवरेट

हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस जयपुर विजिट पर आए थे। वेंस फैमिली ने आमेर का किला घूमा। ताजमहल देखने आगरा गए। फिर वापस जयपुर आकर अमेरिका लौटने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन जयपुर के जायकों की चाहत उषा वेंस को मशहूर रावत मिष्ठान भंडार तक ले गई। यहां उन्हें भा गए ठंडाई और हनी लड्डू। आज राजस्थानी जायका की इस कड़ी में आपको भी रूबरू करवाते हैं इन दो खास लड्डुओं के जायका से…. अचानक पहुंचीं लेडी वेंस, पसंद आए 2 लड्डू जयपुर में प्याज कचौरी खानी हो तो सबसे पहला नाम आता है रावत मिष्ठान भंडार। इसी ठिकाने पर 24 अप्रैल की शाम 4.45 बजे ऊषा वेंस का काफिला रुका था। रावत मिष्ठान भंडार की डायरेक्टर आज्ञा देवड़ा ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति की पत्नी का यहां आना पहले से शेड्यूल नहीं था। दोपहर दो बजे उन्हें अचानक सूचना मिली कि वह शॉप पर आएंगी। इसके वे आईं प्याज कचौरी चखने के बाद दो लड्डू उन्हें बहुत पसंद आए। शहद में बनने वाले हनी लड्डू और ठंडाई लड्डू। इसके अलावा उन्होंने तरबूज कतली भी पैक करवाई। हनी लड्डू : बिना चीनी के शहद से बढ़ाते हैं नेचुरल मिठास आज्ञा देवड़ा ने बताया यह पूरी तरह से ड्राई फ्रूट्स के बने लड्डू हैं। इसमें किसी भी तरह की शक्कर-चीनी का इस्तेमाल नहीं होता। मावा भी नहीं मिलाते। 4 तरह के ड्राई फ्रूट्स में नेचुरल मिठास देने के लिए शहद डाला जाता है। काजू, बादाम, किशमिश और अखरोट की कटिंग करते हैं। कुछ बारीक और कुछ आधे-आधे कट किए जो हैं। इसे देसी घी में डीप फ्राई किया जाता है। हल्का ठंडा होने के बाद इसे हनी से मिक्स किया जाता है। इसमें हल्का सा घी लेकर गोल-गोल लड्डू बनाए जाते हैं। ये लड्डू 2 महीने तक खराब नहीं होते। यह हर मौसम की मिठाई है, जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। सर्दियों में अंजीर और डेट्स का भी उपयोग करते हैं। इसकी एक किलो की कीमत 1650 रुपए है। ठंडाई लड्डू : 4 फ्लेवर में होते हैं तैयार इसकी चार वैरायटी तैयार की जाती हैं। चॉकलेट, मिल्क चॉकलेट, मैंगो और स्ट्रॉबेरी लड्‌डू। होली और गर्मी के सीजन में सबसे ज्यादा डिमांड में होती है। यह कलरफुल डिश है। इसे बनाने के लिए काजू को बारीक पीसकर उसकी घी में सिकाई करते हैं। उसका पेस्ट बनाया जाता है। अब इसमें चिरौंजी, खरबूजा बीज पीसा हुआ, सौंफ, घर के गुलाब के सुखाए हुए पत्ते, काली मिर्च, बटर स्कॉच के छोटे छोटे पीस, बारीक पिसी हुई केसर मिलाई जाती है। वनीला बींस डाले जाते हैं, ताकि यह क्रंची बनी रहे। लड्डू की शेप में बांधकर वैरायटी के हिसाब से कोटिंग करते हैं। चॉकलेट फ्लेवर में डार्क चॉकलेट से कोटिंग करते हैं। इसकी शेल्फ लाइफ अच्छी होती है। इसमें किसी भी प्रकार का मैदा यूज नहीं होता है। ठंडाई लड्डू इसलिए कहा जाता है क्योंकि लड्डुओं की सामग्री वही है जिससे ठंडाई तैयार होती है। गर्मी के मौसम में ये शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं। 175 साल पुरानी लेगेसी, प्याज कचौरी की शुरुआत भी यहीं से मानी जाती है रावत मिष्ठान भंडार की डायरेक्टर आज्ञा देवड़ा ने बताया कि लगभग 175 साल पहले हमारे पूर्वज रावतमल देवड़ा ने जोधपुर से रावत मिष्ठान भंडार की शुरुआत की थी। जोधपुर के लोगों को चटपटा बहुत पसंद है। नमकीन के क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है, वहां मिर्ची बड़ा बहुत फेमस रहा है। पहले हर चीज आलू में बना करती थी, फिर हमारे पूर्वजों ने इनोवेशन करते हुए प्याज के साथ कचौरी बनाई और उसके बाद मावा में कचौरी तैयार की। इसे सभी जगह पसंद किया गया है और इन दोनों चीजों की वजह से हमारी बुनियाद बनी। आगे बढ़ने से पहले देते चलिए आसान से सवाल का जवाब जयपुर में खोले 6 स्टोर 1972 में हमने जयपुर में रावत मिष्ठान भंडार की शुरुआत की। यहां पोलोविक्ट्री पर छोटी सी दुकान हुआ करती थी। यहां लोगों को प्याज और मावा की कचौरी इतनी पसंद आई कि दिल्ली-मुंबई तक डिमांड होने लगी। आज दुनिया के कई देशों में यहां की कचोरी और मिठाइयों की चर्चा है। यह एक टूरिज्म का हिस्सा बन गया है, जो जयपुर आ रहा है, वह रावत आकर खाकर जा रहा है। जयपुर में अभी छह स्टोर हैं। हम अलग-अलग जगह पर इसलिए आए, क्योंकि हर उम्र के लोगों को यह स्वाद पसंद है। बच्चन-कोहली से लेकर कई सेलिब्रिटी चख चुके स्वाद आज्ञा देवड़ा ने बताया कि देश-दुनिया के नामचीन लोग कचौरी और मिठाइयों को पसंद कर चुके हैं। शिल्पा शेट्‌टी, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय, विराट कोहली ने भी हमारा स्वाद चखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह को भी हमारी कचौरी को पसंद करते हैं। दिल्ली के लिए हमारे यहां से कचौरी और मिठाइयां रोजाना जाती है। जयपुर की सभी बड़ी होटल्स में होने वाली शादियों की हमारी डिशेज को प्राथमिकता दी जाती है। हमारे यहां 150 के करीब मिठाइयां है, सर्दियों में इनकी संख्या बढ़ जाती है। पिछले राजस्थानी जायका में पूछे गए प्रश्न का सही उत्तर
ये हैं राजस्थान के फेमस मिर्ची के टिपोरे। दाल-बाटी-चूरमा, जितना खास है, उतने ही खास यहां के चटपटे स्वाद वाले मिर्ची के टिपोरे हैं। बड़ी-बड़ी दावतों में मिर्ची के टिपोरे बड़े चाव के साथ खाए जाते हैं।…(CLICK कर पूरा पढ़ें)

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