राजस्थान क्राइम फाइल के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि गुरुकुल में रहने वाले 7 साल के मासूम सव्य सांची की चाकुओं से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। हत्या करने के बाद सव्य की लाश को गुरुकुल के पास बने खेत में फेंक दिया था। पुलिस ने सव्य की हत्या के मामले में हर एंगल की जांच करने के बाद गुरुकुल के आचार्य और सव्य के मौसेरे भाई सौरभ को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस की सख्ती के आगे सौरभ टूट गया। उसने सव्य की हत्या करना कबूल कर लिया। सौरभ ने सव्य की हत्या 3 जुलाई की रात को ही कर दी थी। हत्या करने के बाद सव्य की लाश को रात में ही बाथरूम के पास लाकर बाड़ के ऊपर से पास के खेत में फेंक दिया। अब पढ़िए आगे की कहानी… सौरभ ने बताया कि वह पोर्न देखने के आदी था। पोर्न देखने के बाद वह आश्रम में ही रहने वाले एक बच्चे से कुकर्म करता था। वह उस बच्चे को आश्रम में हर तरह से सुविधा देता था। जिसके कारण वह बच्चा उसका विरोध नहीं करता था। सौरभ का ये घिनौना खेल लंबे समय से चल रहा था। इसके बावजूद किसी को सौरभ पर कभी भी शक नहीं हुआ। 3 जुलाई की रात को सौरभ हमेशा की तरह आश्रम के उसी 14 साल के बच्चे के साथ कुकर्म कर रहा था। उस दौरान सव्य की नींद खुल गई। सव्य ने सौरभ और उस 14 साल के बच्चे को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। जिसके बाद सौरभ को अपना राज खुलने का डर सताने लगा। सौरभ को अपनी प्रतिष्ठा बचाने का एक ही तरीका लगा- सव्य की हत्या। धोती से मुंह बंद किया, चाकू से गोदा सौरभ ने बताया कि वह और नाबालिग सव्य को पहले आश्रम भवन की छत पर लेकर गए। वहां उसका मुंह बंद कर उसके सिर पर चाकू से हमला किया। उसके बाद उसकी धोती और रस्सी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। आश्रम के भवन से सव्य की लाश को वह बाथरूम के पास लेकर आए। वहां उसके सिर पर पत्थर और मिट्टी के ढेलों से बार बार हमला किया। मरने की पुष्टि होने के बाद सव्य की लाश को पास के खेत में फेंक दिया। दोपहर में गायब होने की बात सौरभ व नाबालिग ने फैलाई सव्य के 4 जुलाई के गायब होने की बात सौरभ और नाबालिग ने ही फैलाई थी। नाबालिग ने ही आश्रम के बच्चों को बताया कि सव्य ने दोपहर में पपीता खाया और बाद में बाथरूम की तरफ चाकू धोने के लिए गया था। उसके बाद सव्य नजर नहीं आया। सौरभ और उस नाबालिग का ये झूठ ही मर्डर मिस्ट्री को सॉल्व करने में मददगार साबित हुआ।आश्रम के दूसरे बच्चे ने बताया कि 4 जुलाई की सुबह सौरभ और उस नाबालिग ने आश्रम के अन्य 15 बच्चों को एकत्रित किया। उन्हें डराया धमकाया और सव्य के आश्रम से गायब होने की झूठी कहानी पुलिस को बताने के लिए मजबूर किया। आश्रम की संपत्ति का था विवाद, इसलिए पास की जमीन पर फेंकी लाश सव्य जिस गुरुकुल में पढ़ता था। उसकी स्थापना आर्य समाज के स्वामी ऋतिमानंद महाराज ने की थी। सव्य की हत्या से करीब 8 साल पहले उनका निधन हो गया था। जिसके बाद उनकी समाधि आश्रम में ही दी गई थी। स्वामी की शिष्या अपने पुत्र के साथ आश्रम के अगले हिस्से में रहती थी। वहीं पीछे की तरफ बने भवन में आर्य समाज की गतिविधियां संचालित होती थी। उसी भवन में गुरुकुल संचालित किया जा रहा था। आश्रम की संपत्ति को लेकर इन दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। विवाद कोर्ट में विचाराधीन था। ऐसे में आचार्य सौरभ ने सव्य का शव दूसरे पक्ष के खेत में फेंक दिया। ताकि हत्या का शक दूसरे पक्ष पर आ जाए। इसके बाद 4 जुलाई को फोन कर आश्रम के ट्रस्ट और पुलिस को मासूम की हत्या और शव खेत में पड़ा होने की जानकारी दी। पुलिस को बताया गया कि मासूम 4 जुलाई को दिन में डेढ़ बजे पपीता खाने के बाद चाकू धोने बाथरूम की ओर गया था। मौके के हालात देखने के बाद पुलिस को शुरू से ही संदेह था, मगर आरोपी सौरभ ने आश्रम के दूसरे गुट के हरीश नायक उसके परिजनों पर हत्या के आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जब गुरुकुल में मिली 7 साल के बच्चे की लाश:गला घोंटा, बेरहमी से चाकू से गोदा सिर, अपना ही निकला हत्यारा, पार्ट-1


