रोशनी घर के पास 81 साल पुरानी रामपुरिया आइस फैक्ट्री की मेंटीनेंस ही समय पर नहीं हो पा रही है। बुधवार को अमोनिया गैस लीक होने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन यह कह कर लौट गई कि इसमें उनका कोई रोल नहीं है। रामपुरिया आइस फैक्ट्री आजादी से पहले 1944 में शुरू होनी बताई जा रही है। वहां लगी मशीनें भी उस जमाने में इंग्लैंड से मंगवाई गई थी, लेकिन अब किसी काम की नहीं है। रोशनी घर के पास करीब दो बीघा जमीन पर यह फैक्ट्री है। आसपास विनोबा बस्ती बस चुकी है। बुधवार को सुबह अमोनिया गैस के रिसाव की घटना होने पर इस फैक्ट्री को लेकर काफी जानकारियां सामने आई हैं। घटना को देखते हुए राजस्व तहसीलदार राजकुमारी बिश्नोई, खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के निरीक्षक भी मौके पर पहुंचे, लेकिन औचारिकता करके लौट गए। इस मामले को लेकर भास्कर ने पीएचईडी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निगम, तहसीलदार और सदर थाना पुलिस से बात की, लेकिन सभी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। विनोबा बस्ती के लोग गैस रिसाव को लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि यह हादसा दिन में हुआ था। इसलिए सभी सचेत हो गए। यदि रात में गैस लीक हुई तो सोते ही रह जाएंगे। घटना स्थल पर सबसे पहले सदर थाना एसएचओ दिगपाल सिंह पहुंचे। कांग्रेसी नेता युनूस अली सहित मोहल्ले के लोगों ने घटना की जानकारी देते हुए फैक्ट्री संचालक पर कार्यवाही करने की मांग की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि गैस लीक होने के मामले में पुलिस का कोई रोल नहीं है। किसी तरह की दुर्घटना या मारपीट होती तो कार्यवाही भी करते। इस मामले को लेकर रात तक सदर थाने में कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। युनूस का कहना है कि पुलिस का रवैया ठीक नहीं है। अभी तो हालात समय रहते काबू में आ गए कोई बड़ी घटना भी हो सकती है। दरअसल फैक्ट्री में सुरक्षा की दृष्टि से कोई इंतजाम नहीं है। वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मास्क तक नहीं है। अग्निशमन यंत्र भी एक ही है। दूसरा खराब पड़ा है। फैक्ट्री का ऑपरेटर तक नहीं था। एक निजी डेयरी से बुलाना पड़ा। वह भी किस्मत से दिल्ली से यहां डेयरी का चीलिंग प्लांट देखने के लिए आया हुआ था। 48 घंटे में तैयार होती है 200 सिल्ली रामपुरिया आइस फैक्ट्री में 48 घंटे में बर्फ की 200 सिल्ली तैयार होती है। एक सिल्ली का वजन 140 किलो होता है। बर्फ बनाने के लिए अमोनिया गैस का उपयोग किया जाता है। फैक्ट्री में काम करने वाले अशोक पांडिया बताते हैं कि अमोनिया गैस का 60 किलो का एक सिलेंडर आता है। एक साल में चार-पांच सिलेंडर लगते हैं, जिन्हें एक ही बार में एक बड़े लोहे के पाइप में स्टोर कर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि सर्दिया में फैक्ट्री बंद रहती है। गर्मियों के ज्यादा डिमांड होने पर ही रात में चलाते हैं। “गैस लीकेज की सूचना पर मैं मौके पर गया था, लेकिन ऐसा कोई बड़ा मैटर नहीं था। वॉल लीकेज था, जिसे थोड़ी देर में दुरुस्त कर दिया गया था। क्राइम का मैटर नहीं होने के कारण कोई केस भी दर्ज नहीं हुआ है।” -दिगपाल सिंह, एसएचओ, सदर


