रामनगरी अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। पांच फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को रिजल्ट आएगा। राजनीतिक दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ मिल्कीपुर के उपचुनाव पर भी रहेगी। इस सीट पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला होगा। दोनों ही दलों की साख इस सीट पर दांव पर रहेगी। दोनों ही दलों के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक पर पकड़ की परीक्षा होगी। भाजपा लोकसभा चुनाव में अयोध्या में हार का बदला लेना चाहती है। वहीं, अखिलेश के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है। नवंबर में विधानसभा की 9 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने सात और सपा ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद उपचुनाव में मिली जीत से योगी सरकार और भाजपा उत्साहित है। सरकार और संगठन ने करीब छह महीने पहले से ही मिल्कीपुर सीट पर चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। इसलिए महत्वपूर्ण है मिल्कीपुर
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के बावजूद लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट भाजपा हार गई। जिस अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को भाजपा ने मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। वही सीट भाजपा हार गई। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ पूरे देश में भाजपा के खिलाफ गलत संदेश गया। वहीं सपा ने अयोध्या सीट जीतकर सड़क से संसद तक इसे बड़ा मुद्दा बनाया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के सांसद अवदेश पासी के जरिए यह संदेश देने का प्रयास भी किया कि अब दलित वोट भी सपा के साथ है। अखिलेश ने संसद में अवधेश पासी को पहली पंक्ति में जगह दिलाकर दलित वोट साधने का प्रयास भी किया। संदेश की राजनीति होगी
अयोध्या सीट जीतकर भाजपा संदेश देना चाहती है कि संविधान बदलने और दलित आरक्षण समाप्त करने का विपक्ष का भ्रामक प्रचार अब बेअसर हो गया है। अयोध्या जिले की मिल्कीपुर सीट सपा से छीन कर यह भी संदेश दिया जाएगा कि अयोध्या में राम लहर और राष्ट्रवाद बरकरार है। वहीं सपा मिल्कीपुर सीट जीतकर संदेश देना चाहेगी कि दलित और पिछड़े वोट बैंक में उसकी पकड़ बरकरार है। सपा का PDA फॉर्मूला अभी भी कारगर है। सीएम योगी ने 5 बार दौरा किया
सीएम योगी आदित्यनाथ जुलाई से लेकर 4 जनवरी तक मिल्कीपुर का 5 बार दौरा कर चुके हैं। सीएम योगी ने वहां भाजपा के कार्यकर्ताओं की बैठक के साथ प्रशासनिक बैठकें भी ली हैं। पार्टी और प्रशासन के फीडबैक के आधार पर मिल्कीपुर में कील-कांटे भी दुरुस्त किए हैं। सितंबर 2024 में सीएम योगी ने वहां एक हजार करोड़ रुपए की 83 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया था। 15 दिसंबर को आयोजित रोजगार मेले में एक हजार से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं। सरकार और संगठन के दिग्गजों की टीम तैनात
भाजपा ने मिल्कीपुर सीट के लिए छह मंत्रियों की टीम तैनात की है। इनमें दो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल हैं। कृषि मंत्री एवं पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, सहकारिता मंत्री और चुनाव प्रबंधन के अनुभवी जेपीएस राठौर, खेलकूद राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरीश यादव, राज्यमंत्री सुनील शर्मा और मयंकेश्वर शरण सिंह को वहां तैनात किया है। वहीं भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सेंथवार, एमएलसी अवनीश पटेल और अयोध्या के प्रभारी अंबेडकर नगर के पूर्व जिलाध्यक्ष मिथलेश त्रिपाठी को वहां तैनात किया है। चुनावी तैयारी में भाजपा आगे
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्रनाथ भट्ट मानते हैं कि मिल्कीपुर में उपचुनाव की तैयारी में अभी भाजपा ने बढ़त बना रखी है। सीएम योगी ने मिल्कीपुर सीट की कमान अपने हाथ ले रखी है। योगी सरकार और भाजपा बीते छह महीने से उपचुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव या किसी अन्य बड़े नेता का वहां कोई दौरा नहीं हुआ है। अलबत्ता अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ही चुनावी तैयारी कर रहे हैं। चुनावी तैयारी के लिहाज से भाजपा ने बढ़त बना रखी है। हालांकि प्रत्याशी के मामले में देखें तो सपा ने बढ़त बना ली है। पिछले उपचुनाव में ही सपा ने सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को टिकट दे दिया था। भाजपा ने अभी टिकट फाइनल नहीं किया है। यही वजह है कि अवधेश प्रसाद पूरा जोर लगा रहे हैं।
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अयोध्या के मिल्कीपुर में चुनाव का ऐलान:5 फरवरी को वोटिंग, 8 को नतीजे; 10 जनवरी से नामांकन अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। 5 फरवरी को वोटिंग होगी। नतीजे 8 फरवरी को आएंगे। 10 से 17 जनवरी से नामांकन दाखिल किए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…


