अरावली पर्वतमाला की 100 मीटर की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने कहा- अवैध खनन से पर्यावरण को बड़ी क्षति हो सकती है। इसलिए अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक और जांच के लिए विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन करना चाहती है। ऐसे में मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर को चार सप्ताह में खनन में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने के निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने बुधवार को यह आदेश दिया। कोर्ट ने मामले के अंतिम निपटारे तक 20 नवंबर के आदेश पर रोक को जारी रखा है। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। इस पर हुआ था विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन के आदेश दिए थे। जिससे पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश देते हुए केंद्र और अरावली के चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था। अरावली पर्वतमाला को संरक्षण करना महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा- यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं है, बल्कि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण करना उद्देश्य है। पीठ ने कहा कि 29 दिसंबर 2025 के आदेश में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिन पॉइंट को रेखांकित किया था। उन्हें देखते हुए अरावली की परिभाषा से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक एवं विधिक पहलुओं की पुनः समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय की आवश्यकता हो सकती है। — ये खबर भी पढ़िए- अरावली केस; सुप्रीम कोर्ट का अपने ऑर्डर पर स्टे:पहले 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन को मंजूरी दी थी, अब रोक लगाई अरावली पर्वतमाला को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी है। 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन के आदेश दिए थे। (पढ़िए पूरी खबर)


