अरावली पर्वतमाला पर सियासत:राजेंद्र राठौड़ ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर भ्रम फैला रही कांग्रेस

अरावली पर्वतमाला में खनन को लेकर भाजपा के नेता और कांग्रेस के नेता आमने सामने हो गए है। भाजपा नेताओं ने रविवार को प्रेस वार्ता कर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार किया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष व भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व सीएम पर आरोप लगाते हुए कहा कि गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर अरावली को लेकर लोगों में भ्रम फैला रहे है। राठौड़ ने कहा कि अरावली पर कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अरावली हिल्स को 100 मीटर ऊंचाई के मानदंड से परिभाषित करना कोई नया या राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस शासनकाल में ही तय हुआ था। 2003 में जिलेवार नक्शे भी गहलोत ने जारी किए थे। गहलोत के अरावली बचाओ ‘सेव अरावली’ अभियान को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का समर्थन भी नहीं मिल रहा है। राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश, सरकारी रिकॉर्ड और वैज्ञानिक तथ्य से साबित होता है कि अरावली न पहले खतरे में थी, न आज है और न आगे होगी। प्रेसवार्ता में विधायक कुलदीप धनकड़ व महेन्द्र ​पाल मीणा, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रमोद वशिष्ठ मौजूद रहे। ‘90% अरावली खत्म’ का दावा पूरी तरह भ्रामक पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि पूर्व सीएम गहलोत की ओर से “90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी” का दावा पूरी तरह असत्य और भ्रामक है। वास्तविक यह है कि अरावली क्षेत्र का 25 फीसदी हिस्सा अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और आरक्षित वनों में आता है, यहां खनन प्रतिबंधित है। पूरे अरावली क्षेत्र में से केवल 2.56 प्रतिशत क्षेत्र ही सीमित, नियंत्रित और कड़े नियमों के तहत खनन के दायरे में आता है। राजस्थान के राजसमंद में 98.9%, उदयपुर में 99.89%, गुजरात के साबरकांठा में 89.4% और हरियाणा के महेंद्रगढ़ में 75.07% पहाड़ी क्षेत्र खनन से प्रतिबंधित रहेगा। खनन नहीं बढ़ेगा, सख्त हुए नियम राठौड़ ने कहा कि 100 मीटर का मानदंड केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार 100 मीटर या उससे ऊँची पहाड़ियों, उनकी ढलानों और दो पहाडिय़ों के बीच 500 मीटर के क्षेत्र में आने वाली सभी भू-आकृतियां खनन पट्टे से पूरी तरह बाहर रखी गई हैं, चाहे उनकी ऊंचाई कुछ भी हो। केंद्र सरकार का रुख साफ राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव भी स्पष्ट कर चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अरावली पर्वतमाला पर कोई आंच नहीं आएगी। पूरी प्रक्रिया कोर्ट के आदेशों पर आधरित है। मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि अरावली क्षेत्र में 20 से अधिक फॉरेस्ट रिजर्व पहले की तरह पूरी तरह संरक्षित रहेंगे। पहले टॉप को छोड़कर नीचे से खुदाई कर ली जाती थी, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा। जूली ने कहा- प्रदेश को रेगिस्तान बनाने के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहे भाजपा नेता नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र व राज्य सरकार पर अरावली का चीरहरण करने का आरोप लगाया है। जूली ने कहा कि भू-माफियाओं और खनन माफियाओं को पनपाने के लिए भाजपा की सरकार ने राजस्थान की जनता का मौत का फरमान जारी किया है। एक पेड़ मां के नाम लगाने वाले भाजपा के नेता लाखों पेड़ काटकर अरावली पवर्तमालाओं को खोखला करने जा रहे हैं। सेव अरावली-सेव सरिस्का की मुहिम को आगे बढ़ाते हम सभी को संयुक्त रूप से मिलकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना होगा। यह न केवल कांग्रेस पार्टी की लड़ाई है, बल्कि देश के चार राज्यों को बचाने का महाअभियान है। हरियाली बचाने का संदेश देने वाले आज अरावली पर्वत श्रृंखलाओं का गला घोट रहे हैं। भाजपा नेताओं की ओर से दिए जा रहे घाव हमारी आने वाली पीढ़ी का जीवन संकट में डाल रहे हैं। फिर भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ हास्यास्पद बयानबाजी कर केवल सुर्खियां बटोरने का काम कर रहें हैं। गहलोत ने कहा- काेर्ट ने खारिज किया तो भाजपा सही क्यों ठहरा रही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि सत्य यह है कि 2003 में तत्कालीन राज्य सरकार की समिति ने 100 मीटर की परिभाषा की सिफारिश की थी, जिसे एफिडेविट के माध्यम से 16 फरवरी 2010 को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। हमारी सरकार ने इसे स्वीकार किया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से मैपिंग करवाई। अवैध खनन पकड़ने के लिए रिमोट सेंसिंग का उपयोग करने के निर्देश दिए। सवाल यह है कि जो परिभाषा कोर्ट में खारिज हो चुकी थी, उसी की सिफारिश भाजपा सरकार ने केन्द्र सरकार की समिति से क्यों की? अरावली बचाओ जीवन बचाओ सत्याग्रह पदयात्रा पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के नेतृत्व में रविवार को जयपुर में अरावली बचाओ जीवन बचाओ सत्याग्रह पदयात्रा निकाली गई। अंबेडकर सर्किल पर मौन सत्याग्रह किया गया। खाचरियावास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम सहमत नहीं हैं। भारत सरकार को अपनी राय बदलकर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखकर फैसले को बदलवाना चाहिए, अन्यथा टकराव होगा। पदयात्रा में विधायक रफीक खान, कांग्रेस नेता गंगा देवी, पुष्पेंद्र भारद्वाज, अर्चना शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। अरावली बचाओ शिविर इधर, शाहपुरा में कांग्रेस विधायक मनीष यादव की ओर से सोमवार को अरावली संरक्षण को समर्पित शिविर लगाया जाएगा। शिविर अरावली के संरक्षण को लेकर रक्तदान के साथ जनजागरूकता के लिए होगा।

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