अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद (IHP) और राष्ट्रीय बजरंग दल (RBD) के कार्यकर्ताओं ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा से संबंधित ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण 250 करोड़ वर्ष पुरानी यह पर्वतमाला खतरे में है। न्यायालय ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 20 नवंबर 2025 को दिए अपने निर्णय में 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला का हिस्सा माना है। इस फैसले के परिणामस्वरूप अरावली की लगभग 90% पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो गई हैं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अरावली पर्वतमाला संपूर्ण उत्तर भारत और राजस्थान का सुरक्षा कवच है। यदि इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो भविष्य में राजस्थान और पूरे उत्तर भारत में जल, जंगल और जमीन सुरक्षित नहीं रहेंगे, जिससे रेगिस्तान का अप्रत्याशित विस्तार होगा। इस मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर न्यायालय के फैसले को वापस लेने की मांग की गई। दूसरे ज्ञापन में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की लगातार हो रही हत्याओं पर विरोध जताया गया। कार्यकर्ताओं ने उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर बांग्लादेश का झंडा भी जलाया। ज्ञापन में कहा गया कि तख्तापलट के बाद से ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को कट्टरपंथी तत्वों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। तख्तापलट के दौरान शुरू हुए आंदोलन से लेकर अब तक सैकड़ों निर्दोष हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है और कई मंदिरों को भी तोड़ा गया है। हाल ही में, अफवाह फैलाकर निर्दोष दीपू चंद दास की निर्मम हत्या कर दी गई। कट्टरपंथियों ने दीपू को नग्न अवस्था में घसीटते हुए ले जाकर एक पेड़ पर टांगकर आग लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना से देश और दुनिया भर के हिंदू समाज में गहरा आक्रोश है। कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार से बांग्लादेश के हिंदुओं की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने और बांग्लादेश के साथ सभी व्यापारिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की।


